GST 2.0 ने बदली इंडस्ट्री की चाल, FY26 में ऑटो सेक्टर करेगा कमाल

नई दिल्ली: GST 2.0 ने इंडियन ऑटो इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है। जो सेक्टर लंबे समय से सुस्त बिक्री, ऊंचे टैक्स और कमजोर उपभोक्ता भरोसे से जूझ रहा था, उसे अब ठोस राहत मिली है।

टैक्स बोझ कम होने से गाड़ियां किफायती हुईं, खरीदारी का माहौल बेहतर हुआ और ग्राहकों का भरोसा लौटा। इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ा और इंडस्ट्री, जो FY26 में मामूली बढ़त की उम्मीद कर रही थी, अब डबल डिजिट ग्रोथ की ओर बढ़ती नजर आ रही है। GST 2.0 ऑटो सेक्टर के लिए नया ग्रोथ ट्रिगर बनकर उभरा है। अगर 2025 में ऑटो इंडस्ट्री के लिए किसी एक निर्णायक फैसले को याद किया जाए, तो वह निस्संदेह GST दरों में कटौती होगी। यह OEMs की लंबे समय से चली आ रही मांग थी। इससे पहले सेक्टर सुस्त डिमांड, सतर्क उपभोक्ता भावना और कमजोर ग्रामीण रिकवरी के दबाव में था।

ऐसे माहौल में 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा अचानक की गई GST कटौती की घोषणा ने पूरे सेक्टर में नई जान फूंक दी। चार मीटर से छोटी पैसेंजर कारों और कॉम्पैक्ट SUVs पर GST को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया। यह फैसला ऐसे समय पर आया जब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला था। अक्टूबर में ऑटो रिटेल सेल्स 40.5 फीसदी उछलकर ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गईं। दोपहिया वाहनों की बिक्री 52 फीसदी बढ़ी, पैसेंजर व्हीकल्स में 11.35 फीसदी और थ्री-व्हीलर्स में 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

लग्ज़री कार सेगमेंट के लिए भी GST 2.0 गेमचेंजर साबित हो सकता है। पहले जहां लग्ज़री गाड़ियों पर 28 फीसदी GST के साथ 15 से 22 फीसदी तक सेस लगता था और कुल टैक्स बोझ 43–50 फीसदी तक पहुंच जाता था, अब इसे फ्लैट 40 फीसदी GST तक सीमित कर दिया गया है। SIAM के मुताबिक, अक्टूबर-नवंबर में मिनी कार्स की बिक्री में 3 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि सब-4 मीटर कॉम्पैक्ट SUVs में 17 फीसदी का उछाल देखने को मिला। लंबे समय से ऊंचे टैक्स और लागत दबाव से जूझ रही भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को GST 2.0 ने जरूरी सांस लेने की जगह दी है। मौजूदा रुझानों और बढ़ते भरोसे को देखें, तो FY26 का अंत डबल डिजिट ग्रोथ के साथ होना अब सिर्फ उम्मीद नहीं, बल्कि एक मजबूत संभावना बनता जा रहा है।