इंडिया में मोबाइल क्रांति से चीन को टक्कर: 12–18 महीनों में ‘Made in India’ स्मार्टफोन की एंट्री तय

नई दिल्ली: इंडिया अब स्मार्टफोन इंडस्ट्री में सिर्फ फोन जोड़ने वाला देश नहीं, बल्कि अपना खुद का मोबाइल ब्रैंड बनाने वाला देश बनने जा रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) दावोस में कहा कि अगले 12 से 18 महीनों में भारत के अपने स्मार्टफोन ब्रांड लॉन्च हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय बाजार में लंबे समय से मजबूत पकड़ बनाए बैठी चीन की मोबाइल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।

पिछले 10 सालों में भारत ने मोबाइल बनाने में बहुत तेजी से तरक्की की है। 2014 में भारत में सिर्फ 2 मोबाइल फैक्ट्री थीं। आज 300 से ज्यादा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स काम कर रही हैं। 2024 तक भारत में बिकने वाले 99% से ज्यादा फोन भारत में ही बने हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री ने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम अब काफी मजबूत हो चुका है। पहले हम सिर्फ फोन के पार्ट्स जोड़ते थे, लेकिन अब मोबाइल के पुर्जे (चिप, डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा आदि) की सप्लाई चेन तैयार हो रही है। डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरा काम भारत में हो रहा है। सरकार मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर कंपनियों को भारी प्रोत्साहन दे रही है।
अगर देसी स्मार्टफोन ब्रैंड आए तो मोबाइल सस्ते हो सकते हैं। ज्यादा विकल्प मिलेंगे। देश में लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी। भारत टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कंपनियां भारत की जरूरतों को ज्यादा अच्छी तरह समझेंगी। इससे देश में रिसर्च (R&D), डिजाइन और इनोवेशन का बड़ा इकोसिस्टम तैयार होगा। अभी कई फोन विदेश में डिजाइन होते हैं और भारत में सिर्फ असेंबल होते हैं, लेकिन देसी ब्रैंड आने से डिजाइन से लेकर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर तक सब कुछ भारत में विकसित होगा।

इसका एक और बड़ा फायदा रोजगार है। मोबाइल डिजाइन करने वाले इंजीनियर, चिप डिजाइनर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, फैक्ट्री वर्कर, मार्केटिंग और सर्विस नेटवर्क, लाखों नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। यह कदम सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती देगा। अगर भारतीय स्मार्टफोन ब्रैंड सफल होते हैं, तो भारत ग्लोबल टेक्नोलॉजी बाजार में चीन, कोरिया और अमेरिका को कड़ी टक्कर देने वाला बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।