नई दिल्ली: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। 2025 में कुल EV बिक्री 23 लाख (2.3 मिलियन) यूनिट पार कर गई, जो नए वाहन रजिस्ट्रेशन का करीब 8% हिस्सा है। सबसे ज्यादा EV उत्तर प्रदेश (UP) में हैं, फिर भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर सबसे ज्यादा बिजली दिल्ली में खर्च हो रही है।
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के Vahan डैशबोर्ड के अनुसार, देश में अब तक करीब 80 लाख इलेक्ट्रिक वाहन (शुद्ध EV और बैटरी से चलने वाले वाहन) रजिस्टर्ड हैं। इनमें से सिर्फ 4.8 लाख यानी लगभग 6% EV दिल्ली में हैं। इसके मुकाबले UP में सबसे ज्यादा 15.2 लाख EV हैं। महाराष्ट्र में 9.2 लाख और कर्नाटक में 7.2 लाख EV दर्ज हैं। इसके बावजूद, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) पर सबसे ज्यादा बिजली दिल्ली ने खपत की। इस अवधि में देशभर में PCS पर कुल 993 मिलियन यूनिट (MU) बिजली खर्च हुई, जिसमें से लगभग 240 MU यानी करीब एक-चौथाई बिजली सिर्फ दिल्ली में इस्तेमाल हुई। यह दिखाता है कि दिल्ली में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग काफी ज्यादा हो रहा है।
Central Electricity Authority (CEA) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में महाराष्ट्र ने 227 MU (22.9%), कर्नाटक ने 138 MU (13.9%) और UP ने 131 MU (13.2%) बिजली की खपत की। गाड़ियों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद UP सार्वजनिक चार्जिंग पर दिल्ली से काफी पीछे है। 2024 के अप्रैल से नवंबर के बीच जहां सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) पर 515 मिलियन यूनिट (MU) बिजली खर्च हुई थी, वहीं 2025 में इसी अवधि में यह खपत बढ़कर 993 MU पहुंच गई। मासिक खपत भी 108 MU से बढ़कर 143 MU हो गई, जो लगभग 33% की वृद्धि है।
दिल्ली में EV की संख्या भले UP से कम हो, लेकिन सार्वजनिक चार्जिंग पर बिजली की खपत सबसे ज्यादा यहीं हो रही है। इसके बावजूद राजधानी में चार्जिंग प्वाइंट की भारी कमी है। Commission for Air Quality Management (CAQM) को सौंपे गए एक्शन प्लान के मुताबिक, दिल्ली में 36,177 चार्जिंग प्वाइंट की जरूरत है, जबकि अभी सिर्फ 8,998 ही चालू हैं। सरकार का लक्ष्य 2070 तक देश को नेट-जीरो उत्सर्जन तक पहुंचाना है। इसी दिशा में EV को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, घरों, दफ्तरों और निजी चार्जिंग स्टेशनों पर भी बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है।
