Auto PLI का साइड-इफेक्ट: गैर-PLI इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों की ग्रोथ में भारी गिरावट; C-DEP की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली: सेंटर फॉर डिजिटल इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च (C-DEP) ने इंडिया के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) उद्योग पर Auto PLI (Production Linked Incentive) योजना के प्रभाव का एक चौंकाने वाला विश्लेषण पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ PLI योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना था, वहीं इसने बाज़ार में एक ‘प्रतिस्पर्धी असंतुलन’ पैदा कर दिया है।

ग्रोथ रेट में भारी गिरावट: आंकड़ों की नज़र से

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि PLI योजना के लागू होने के बाद उन कंपनियों (Non-PLI) को भारी नुकसान हुआ है जो इस योजना का हिस्सा नहीं हैं:
FY2022: गैर-PLI कंपनियों की ग्रोथ रेट 407% थी।
FY2024: यह गिरकर -33% पर आ गई।
FY2025: गिरावट जारी रही और यह -11% दर्ज की गई।
मुख्य कारण: PLI-अनुमोदित कंपनियों को 13-16% का कॉस्ट एडवांटेज (लागत लाभ) मिलता है। इसका उपयोग तकनीक विकसित करने के बजाय घरेलू बाज़ार में आक्रामक प्राइसिंग के ज़रिए हिस्सेदारी बढ़ाने में किया जा रहा है।

चीन से हारने का जोखिम: निर्यात पर खतरा

अध्ययन में एक गंभीर चेतावनी दी गई है कि भारत अपने पारंपरिक निर्यात बाज़ारों (नेपाल, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका) को चीन की Yadea और Sunra जैसी कंपनियों के हाथों खो सकता है।
तथ्य: इंडिया के कुल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्यात का 77% हिस्सा गैर-PLI मॉडलों का है।
चिंता: PLI का लाभ पाने वाली कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए ‘टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म’ बनाने में पीछे हैं, जिससे भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता कमज़ोर हो रही है।

‘नॉन-परफॉर्मिंग’ प्लेयर्स और फंड का कम उपयोग

रिपोर्ट ने उन ‘इनएक्टिव’ कंपनियों पर भी सवाल उठाए हैं जो मंज़ूरी मिलने के बावजूद उत्पादन नहीं कर रही हैं:
9 में से सिर्फ 4 कंपनियां सक्रिय: हॉप इलेक्ट्रिक, एक्सिस क्लीन मोबिलिटी, बूमा और एलेस्ट जैसी कंपनियां कोई भी PLI-अनुमोदित मॉडल बनाने में विफल रही हैं।
बजट उपयोग: दिसंबर 2025 तक ₹3,754 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल ₹2,321.94 करोड़ ही वितरित किए गए हैं। यह कुल आवंटित राशि का मात्र 9% है।

इनोवेशन पर मार

इंडिया के कुल टू-व्हीलर बाज़ार में 65% हिस्सेदारी मोटरसाइकिलों की है, लेकिन इलेक्ट्रिक सेगमेंट में इनकी पहुंच मात्र 0.1% है। रिपोर्ट कहती है कि असली इनोवेशन (जैसे हाई-स्पीड मोटरसाइकिल और डिलीवरी स्कूटर) अक्सर उन स्टार्टअप्स द्वारा किया जा रहा है जो PLI के दायरे से बाहर हैं और पूंजी की कमी से जूझ रहे हैं।

C-DEP की मुख्य सिफारिशें:

समय-समय पर समीक्षा: अच्छा प्रदर्शन न करने वाली कंपनियों को बाहर कर फंड का पुनर्वितरण किया जाए।
नवाचार प्रोत्साहन: जटिल इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों के लिए 3-5% अतिरिक्त इंसेंटिव दिए जाएं।
FCFS सिस्टम: ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर वित्तीय स्थान आवंटित हो।