नई दिल्ली: इंडियन गवर्नमेंट द्वारा पेश किए गए Economic Survey 2025-26 ने देश की आर्थिक सेहत की एक बेहद सकारात्मक तस्वीर पेश की है। सर्वे के अनुसार, FY 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में इंडिया की आर्थिक गति न केवल मज़बूत बनी हुई है बल्कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र इस विकास यात्रा का सबसे चमकता हुआ सितारा बनकर उभरा है।
यहाँ सर्वेक्षण की मुख्य बातें दी गई हैं, जो ऑटो सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए बड़े बदलावों को दर्शाती हैं:
ग्रामीण भारत में ‘कंजम्पशन’ का महा-रिकॉर्ड
सर्वे में NABARD के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि इंडिया के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति (Purchasing Power) में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
बढ़ता खर्च: लगभग 79.2% ग्रामीण परिवारों ने पिछले एक साल में अपनी खपत (Consumption) बढ़ने की बात कही है।
आय का हिस्सा: ग्रामीण परिवारों की मासिक आय का 67% हिस्सा अब खर्च (Consumption) पर जा रहा है, जो इस सर्वेक्षण के इतिहास में अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
कारण: GST दरों में कटौती (Rationalization) और कम मुद्रास्फीति (Inflation) ने लोगों के हाथों में अधिक पैसा छोड़ा है।
ऑटो सेक्टर: अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन
इंडियन ऑटोमोटिव उद्योग केवल वाहन नहीं बेच रहा, बल्कि देश के राजस्व और रोज़गार में भी रीढ़ की हड्डी बना हुआ है।
ग्लोबल लीडर: इंडिया Two-Wheelers और Three-Wheelers के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है। वहीं, Passenger Vehicles (PV) और Commercial Vehicles (CV) के मामले में हम विश्व स्तर पर तीसरे नंबर पर हैं।
रोज़गार और टैक्स: यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 30 मिलियन (3 करोड़) से अधिक लोगों को रोज़गार देता है और भारत के कुल GST संग्रह में 15% का भारी-भरकम योगदान देता है।
उत्पादन में वृद्धि: पिछले एक दशक (FY15-FY25) में उत्पादन में 33% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
‘मेड इन इंडिया’ की वैश्विक गूंज (निर्यात)
इंडियन वाहनों की मांग अब केवल देश तक सीमित नहीं है। वित्त वर्ष 2025 में यात्री और वाणिज्यिक सेगमेंट को मिलाकर 5.3 मिलियन से अधिक वाहनों का निर्यात किया गया। निर्यात की यह रफ़्तार वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (H1) में भी दोहरे अंकों (Double-Digit) में बनी हुई है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय इंजीनियरिंग की बढ़ती साख को दर्शाती है।
EV और PLI स्कीम: भविष्य की तैयारी
सरकार की नीतियों ने इंडिया को Electric Vehicle (EV) हब बनाने की दिशा में संरचनात्मक बदलाव किए हैं:
PLI Scheme का जादू: ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट्स के लिए PLI Scheme ने सितंबर 2025 तक ₹35,657 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है और 49,000 नई नौकरियां पैदा की हैं।
बैटरी इकोसिस्टम: PLI ACC Battery Scheme के ज़रिए सरकार एडवांस्ड बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा दे रही है, जिससे EV की लागत कम होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष: क्या कहता है सर्वेक्षण
Economic Survey का निष्कर्ष स्पष्ट है—पॉलिसी में निरंतरता, मज़बूत मांग और वैश्विक एकीकरण (Global Integration) ने ऑटोमोटिव सेक्टर को भारत की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट रणनीति का मुख्य स्तंभ बना दिया है।
