नई दिल्ली: इंडिया के ऑटो मार्केट में 2025 एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। सालों से भारतीय सड़कों पर राज करने वाली पेट्रोल कारों की बादशाहत पहली बार हिली। अब लोग कार ही नहीं खरीद रहे हैं, हिसाब लगाकर फैसला कर रहे हैं। बढ़ती ईंधन कीमतें, रनिंग कॉस्ट का दबाव और माइलेज की हकीकत ने ग्राहकों को पेट्रोल से आगे सोचने पर मजबूर कर दिया है। पेट्रोल कारें पीछे हटीं, वहीं CNG सस्ती दौड़ का भरोसा बनी, इलेक्ट्रिक ने भविष्य की झलक दिखाई, डीज़ल ने SUV के दम पर खुद को जिंदा रखा और हाइब्रिड ने बैलेंस का रास्ता चुना।
2025 में देश में कुल पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री करीब 45.8 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल से लगभग 6 फीसदी ज्यादा है। इसी ग्रोथ के बीच पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 59.4% से फिसलकर 53.3% पर आ गई। साल भर में करीब 1.3 लाख कम पेट्रोल कारें बिकीं।
अब कार दिल से नहीं, दिमाग और जेब से खरीदी जा रही है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और E20 के साथ माइलेज की जमीनी सच्चाई ने आम खरीदार को हर किलोमीटर का हिसाब लगाने पर मजबूर कर दिया। पहले जहां पेट्रोल “सेफ चॉइस” माना जाता था, वहीं अब वही सवालों के घेरे में आ गया है। इसी खाली जगह में CNG ने एंट्री नहीं ली, बल्कि पूरी बाज़ी पलट दी। कम रनिंग कॉस्ट, स्थिर ईंधन कीमतें और फैक्ट्री-फिटेड टेक्नोलॉजी ने इसे झिझक से निकालकर भरोसे की ड्राइवर सीट पर बैठा दिया। Maruti Suzuki और Tata की CNG कारों ने शहरों में यह साबित कर दिया कि अब CNG सिर्फ सस्ता विकल्प नहीं, बल्कि समझदार और भविष्य की सोच वाला फैसला है। जिन डीज़ल कारों को खत्म माना जा रहा था, उन्होंने भी चुपचाप वापसी की। SUV सेगमेंट ने डीज़ल को जिंदा रखा और इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 18.3% हो गई।
इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी करीब दोगुनी होकर 4.6% पहुंच गई। बेहतर रेंज और नए मॉडल्स ने EV को भरोसेमंद बनाया। Toyota Innova Hycross और Maruti Grand Vitara जैसे मॉडल्स के दम पर हाइब्रिड की हिस्सेदारी 2.6% तक पहुंची। 2025 वह साल बन गया जब इंडियन कार खरीदारों को समझ में आ गया कि पेट्रोल ही आखिरी विकल्प नहीं है। इस साल कम खर्च, बेहतर माइलेज और भविष्य की सोच ने कार बाजार की दिशा ही बदल दी।
