नई दिल्ली: MIT World Peace University (MIT-WPU) के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) मॉडल तैयार किए हैं, जो पुराने तेल के कुओं (mature fields) से ज्यादा तेल निकालने और भविष्य में कितना उत्पादन होगा, इसका सटीक अंदाजा लगाने में मदद करेंगे। ऐसे समय में जब दुनियाभर में तेल बाजार अस्थिर है और सप्लाई पर असर पड़ रहा है, यह रिसर्च भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
इंडिया की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। देश की कुल ऊर्जा खपत में तेल-गैस की हिस्सेदारी करीब 32–37% है। भारत हर साल भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, जिस पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। अगर देश अपने ही पुराने तेल क्षेत्रों से ज्यादा उत्पादन कर पाए, तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
प्रोफेसर डॉ. राजीब कुमार सिन्हाराय और उनके रिसर्च स्टूडेंट डॉ. ऋषिकेश चव्हाण की टीम ने एक ऐसा AI मॉडल बनाया है, जो यह बता सकता है कि किसी तेल भंडार में कौन-सी तकनीक अपनाने से ज्यादा तेल निकलेगा। यह मॉडल दुनिया भर के तेल क्षेत्रों के डेटा पर ट्रेन किया गया है और करीब 91% तक सटीक परिणाम देता है। जहां पहले इस तरह का विश्लेषण करने में महीनों लगते थे, अब वही काम कुछ घंटों में हो जाता है।
प्रोफेसर समर्थ पाटवर्धन और डॉ. सौमित्र नांदे ने डीप लर्निंग मॉडल विकसित किया है, जो खास तरह की चट्टानों की पहचान 97% सही-सही कर सकता है। ये वही चट्टानें हैं, जो भारत के सबसे बड़े तेल क्षेत्र बॉम्बे हाई में पाई जाती हैं। वैज्ञानिकों ने एक और AI मॉडल तैयार किया है, जो पुराने तेल क्षेत्रों में भविष्य का उत्पादन कितनी मात्रा में होगा, इसका अनुमान 92% सटीकता के साथ लगा सकता है।
टीम ने तेल निकालने के पाइप के सही डिजाइन के लिए भी AI मॉडल बनाया है । इस तकनीक के लिए पेटेंट भी हासिल किया जा चुका है। यह नई AI तकनीक पुराने तेल कुओं से ज्यादा तेल निकालने, समय, लागत बचाने और भविष्य की प्लानिंग बेहतर बनाने में मदद करेगी। इससे भारत को बाहर से कम तेल खरीदना पड़ेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
