नई दिल्ली: क्या कभी किसी इलेक्ट्रिक गाड़ी के पास से गुजरते हुए चौक गए हैं क्योंकि आपको उसकी आवाज सुनाई नहीं दी? इलेक्ट्रिक गाड़ियों का खामोश होना कई बार पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए खतरा बन जाता है। अब इसी खतरे को कम करने के लिए भारत सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने हाल ही में एक ड्राफ्ट नियम जारी किया है, जिसके तहत M और N कैटेगरी की सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ‘अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम’ (AVAS) लगाना अनिवार्य होगा। अब आपकी खामोश इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी हल्की आवाज निकालेंगी, ताकि आसपास के लोग सतर्क हो सकें।
EVs इंजन की आवाज़ नहीं करते, इसलिए कम स्पीड पर ये लगभग चुपचाप चलते हैं। यह सुविधा अच्छी है, लेकिन पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और दृष्टिहीन लोगों के लिए खतरा बन सकती है। AVAS वाहन की गति के हिसाब से धीर-धीरे आवाज़ निकालता है। 20 किमी/घंटा से कम चलने पर और रिवर्स मोड में खुद-ब-खुद चालू हो जाता है। ज्यादा तेज़ी से चलने पर सिस्टम ऑफ हो जाता है, क्योंकि टायर और हवा की आवाज़ काफी होती है।
यह सिस्टम नोटिफिकेशन के अनुसार, इस नियम को दो चरणों में लागू किया जाएगा। 1 अक्टूबर, 2026 से बाजार में आने वाले M और N कैटेगरी के सभी नए इलेक्ट्रिक वाहनों में AVAS सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. मौजूदा मॉडल की इलेक्ट्रिक गाड़ियां: जो इलेक्ट्रिक गाड़ियां पहले से बाजार में हैं या उनके पुराने मॉडल बन रहे हैं, उनके लिए 1 अक्टूबर, 2027 से ये नियम लागू होगा. यानी, वाहन निर्माताओं को एक साल का अतिरिक्त समय मिलेगा ताकि वे अपने मौजूदा मॉडलों में इस सिस्टम को जोड़ सकें. फिलहाल इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीनपहिया और ई-रिक्शा इस नियम में शामिल नहीं हैं।
यूरोप, जापान और अमेरिका में EVs और हाइब्रिड वाहनों में यह सिस्टम पहले से अनिवार्य है। इंडिया में कुछ EV मॉडल Tata Curvv EV, Hyundai Creta Electric, Mahindra XEV 9e, Mahindra BE 6 पहले ही इसका उपयोग कर रहे हैं।
