नई दिल्ली : इंडिया मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स का ग्लोबल हब बनने की ओर बढ़ रहा है। Tata Electronics ने जर्मनी की मशहूर टेक्नोलॉजी कंपनी Bosch के साथ साझेदारी की है, जो ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। ये सिर्फ एक बिज़नेस डील नहीं बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को असली जमीन पर उतारने वाला मजबूत कदम है। असम और गुजरात में बनने वाले नए प्लांट्स में अब वर्ल्ड क्लास चिप्स और वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स के पार्ट्स इंडिया में ही बनेंगे। वर्ल्ड की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी इंडिया में ही बनेगी। अब गाड़ियों के दिमाग, स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक सर्किट्स भी भारत की धरती पर बनेंगे।
Tata Electronics और Bosch ने एक समझौता किया है। असम में बन रही अत्याधुनिक असेंबली यूनिट और गुजरात की सेमीकंडक्टर फाउंड्री में Tata की मैन्युफैक्चरिंग ताकत और Bosch की जर्मन टेक्नोलॉजी मिलकर ऐसा धमाका करेंगी, जिसकी गूंज ग्लोबल मार्केट तक सुनाई देगी। Tata और Bosch मिलकर ऐसे लोकल प्रोजेक्ट्स शुरू करने जा रहे हैं, जो अब तक विदेशी सप्लाई पर निर्भर थे। जो चिप्स और सिस्टम कल तक बाहर से मंगाने पड़ते थे, वो अब भारत में ही डिज़ाइन होंगे, यहीं बनेंगे और यहीं से दुनिया में भेजे जाएंगे।
Tata Electronics की शुरुआत 2020 में हुई थी। आज इसकी मौजूदगी गुजरात, असम, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में है। कंपनी में 65,000 से ज़्यादा लोग काम कर रहे हैं। वहीं Bosch 1886 से टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को नई दिशा दे रहा है। 60 से ज्यादा देशों में फैले नेटवर्क और 87,000 से अधिक इंजीनियरों व R&D एक्सपर्ट्स की टीम के साथ, Bosch ग्लोबल तकनीकी विश्वसनीयता का प्रतीक बन चुका है।
जब Bosch जैसी वैश्विक तकनीकी महारत Tata Electronics की निर्माण शक्ति के साथ भारत की मिट्टी में रच-बस जाती है तो यह बात सिर्फ चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स तक सीमित नहीं रहती। यह एक मजबूत और आत्मनिर्भर ग्लोबल सप्लाई चेन की नींव रखने का संकल्प बन जाता है। अब यह साझेदारी ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाकर ‘मेड इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड’ की एक चमकदार हकीकत में बदल रही है
