नई दिल्ली: अमेरिका, चीन, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियमों के तहत छोटी और हल्की गाड़ियों को कुछ खास छूट दी जाती है, क्योंकि ये कम ईंधन खपत करती हैं, कम प्रदूषण फैलाती हैं और शहरों में ट्रैफिक भी कम करती हैं। अब भारत सरकार इन देशों के नियमों का अध्ययन इसलिए कर रही है। अगर विदेशी मॉडल से यह साबित होता है कि छोटी कारें सच में फायदेमंद हैं तो भारत में भी CAFE नियमों के तहत उन्हें राहत दी जा सकती है।
अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए CAFE-3 नियम आने से पहले ही कार कंपनियों के बीच टकराव शुरू हो गया है। Maruti Suzuki का कहना है कि छोटी कारें हल्की होती हैं। पेट्रोल-डीज़ल कम खर्च करती हैं। कंपनी चाहती है कि CAFE-3 नियमों में छोटी कारों को कुछ छूट मिले। वहीं Tata Motors का कहना है कि किसी एक तरह की गाड़ी को छूट देना गलत है।
SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने पहली बार सरकार को विस्तृत ग्लोबल डेटा सौंपकर यह दिखाने की कोशिश की है कि दुनिया के बड़े ऑटो बाजार छोटी कारों को अलग नजर से देखते हैं। चीन में 1,090 किलो से कम वजन वाली कारों को फ्यूल एफिशिएंसी नियमों में राहत दी जाती है। यूरोप में 1,115 किलो से हल्की कारों पर सख्ती कम रहती है। दक्षिण कोरिया में 1,100 किलो से कम वजन वाली कारों को नियमों में छूट मिलती है। SIAM चाहता है कि भारत में भी CAFE-3 नियम बनाते समय छोटी कारों को कुछ राहत दी जाए, ताकि आम आदमी के लिए कारें महंगी न हों और साथ ही पर्यावरण का भी संतुलन बना रहे।
प्रस्तावित CAFE-3 ड्राफ्ट के मुताबिक, जो कारें 4 मीटर से छोटी, 909 किलो से कम वजन की, और 1200cc से कम इंजन वाली होंगी, उन कारों पर नियम थोड़े नरम होंगे। दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि भारत में ऐसी हल्की कारें अब कम बिक रही हैं। इसी वजह से सरकार जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहती। Bureau of Energy Efficiency (BEE) सभी पक्षों—कार कंपनियों, इंडस्ट्री संगठनों और विशेषज्ञों—की राय सुनने के बाद ही अंतिम नियम तय करेगा।
