2035 तक इंडिया में 2.2 करोड़ EV बिक्री का लक्ष्य, हर दूसरी गाड़ी हो सकती है इलेक्ट्रिक : रिपोर्ट

नई दिल्ली: इंडिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ सकता है। KPMG India की रिपोर्ट के अनुसार साल 2035 तक देश में EV की कुल बिक्री 2.2 करोड़ (22 मिलियन) यूनिट तक पहुंच सकती है। इतना ही नहीं, दोपहिया, तिपहिया और कार जैसे ज्यादातर वाहन सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा होने का अनुमान है। यह उछाल मजबूत मांग, बेहतर सप्लाई चेन और सरकार की सहायक नीतियों की वजह से संभव होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, पर्यावरण को लेकर जागरूकता और बैटरी तकनीक में सुधार EV की मांग को लगातार बढ़ा रहे हैं। ऑटो कंपनियां भी तेजी से नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो रहा है। इन सब कारणों से आने वाले 10 वर्षों में EV आम लोगों की पहली पसंद बन सकते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, निकल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे खनिज सामान्य गाड़ियों की तुलना में काफी ज्यादा मात्रा में लगते हैं। इन जरूरी खनिजों की रिफाइनिंग क्षमता का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा दुनिया के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में केंद्रित है। इससे भू-राजनीतिक और व्यापारिक जोखिम पैदा हो सकते हैं। अगर सप्लाई में रुकावट आई तो भारत के EV प्लान पर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस चुनौती से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर खनिज खोज और उत्पादन बढ़ा सकता है। जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में संभावित भंडार की पहचान की गई है। इसके अलावा देश में रिफाइनिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। सरकार अगर लोकल रिफाइनिंग को बढ़ावा दे, लंबी अवधि के सप्लाई समझौते करे और वैकल्पिक मटेरियल पर रिसर्च को प्रोत्साहित करे तो आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है।

KPMG के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की EV सफलता सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग पर नहीं, बल्कि कच्चे माल की मजबूत आपूर्ति पर निर्भर करेगी। अगर भारत ने समय रहते रणनीतिक निवेश और नीतिगत फैसले लिए, तो वह वैश्विक EV बाजार में मजबूत और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बन सकता है।

UP में सबसे ज्यादा EV, लेकिन चार्जिंग में दिल्ली नंबर वन

नई दिल्ली: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। 2025 में कुल EV बिक्री 23 लाख (2.3 मिलियन) यूनिट पार कर गई, जो नए वाहन रजिस्ट्रेशन का करीब 8% हिस्सा है। सबसे ज्यादा EV उत्तर प्रदेश (UP) में हैं, फिर भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर सबसे ज्यादा बिजली दिल्ली में खर्च हो रही है।

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के Vahan डैशबोर्ड के अनुसार, देश में अब तक करीब 80 लाख इलेक्ट्रिक वाहन (शुद्ध EV और बैटरी से चलने वाले वाहन) रजिस्टर्ड हैं। इनमें से सिर्फ 4.8 लाख यानी लगभग 6% EV दिल्ली में हैं। इसके मुकाबले UP में सबसे ज्यादा 15.2 लाख EV हैं। महाराष्ट्र में 9.2 लाख और कर्नाटक में 7.2 लाख EV दर्ज हैं। इसके बावजूद, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) पर सबसे ज्यादा बिजली दिल्ली ने खपत की। इस अवधि में देशभर में PCS पर कुल 993 मिलियन यूनिट (MU) बिजली खर्च हुई, जिसमें से लगभग 240 MU यानी करीब एक-चौथाई बिजली सिर्फ दिल्ली में इस्तेमाल हुई। यह दिखाता है कि दिल्ली में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग काफी ज्यादा हो रहा है।

Central Electricity Authority (CEA) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में महाराष्ट्र ने 227 MU (22.9%), कर्नाटक ने 138 MU (13.9%) और UP ने 131 MU (13.2%) बिजली की खपत की। गाड़ियों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद UP सार्वजनिक चार्जिंग पर दिल्ली से काफी पीछे है। 2024 के अप्रैल से नवंबर के बीच जहां सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) पर 515 मिलियन यूनिट (MU) बिजली खर्च हुई थी, वहीं 2025 में इसी अवधि में यह खपत बढ़कर 993 MU पहुंच गई। मासिक खपत भी 108 MU से बढ़कर 143 MU हो गई, जो लगभग 33% की वृद्धि है।

दिल्ली में EV की संख्या भले UP से कम हो, लेकिन सार्वजनिक चार्जिंग पर बिजली की खपत सबसे ज्यादा यहीं हो रही है। इसके बावजूद राजधानी में चार्जिंग प्वाइंट की भारी कमी है। Commission for Air Quality Management (CAQM) को सौंपे गए एक्शन प्लान के मुताबिक, दिल्ली में 36,177 चार्जिंग प्वाइंट की जरूरत है, जबकि अभी सिर्फ 8,998 ही चालू हैं। सरकार का लक्ष्य 2070 तक देश को नेट-जीरो उत्सर्जन तक पहुंचाना है। इसी दिशा में EV को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, घरों, दफ्तरों और निजी चार्जिंग स्टेशनों पर भी बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है।

बजट से पहले EV इंडस्ट्री ने बजाया अलार्म, GST सुधार और टैक्स सपोर्ट जरूरी

नई दिल्ली: देश में आने वाले केंद्रीय बजट से पहले EV कंपनियां सरकार से इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लगने वाला टैक्स सिस्टम ठीक करने और चार्जिंग स्टेशन और बैटरी से जुड़ी सुविधाओं को ज्यादा सपोर्ट चाहती हैं। कंपनियों का कहना है कि अगर सरकार ने टैक्स में जरूरी बदलाव नहीं किए, तो EV गाड़ियां महंगी पड़ सकती हैं और लोग उन्हें खरीदने से पीछे हट सकते हैं।

EV इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार बजट में ऐसे फैसले ले, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ियां सस्ती रहें, चार्जिंग आसान हो और EV अपनाने की रफ्तार बनी रहे। अभी इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर तो सिर्फ 5% GST लगता है, लेकिन उसे बनाने में जो जरूरी पार्ट्स लगते हैं, उन पर 18% GST देना पड़ता है। इससे गाड़ी बनाने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है। कंपनियों का कहना है कि पहले EV पेट्रोल-डीज़ल गाड़ियों से सस्ती पड़ती थीं । लेकिन ज्यादा टैक्स की वजह से अब यह फायदा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। अगर पार्ट्स पर टैक्स कम नहीं हुआ तो EV सस्ती रहने का फायदा खत्म हो सकता है और लोग फिर पेट्रोल-डीज़ल गाड़ियों की तरफ लौट सकते हैं।

Zenergize के को-फाउंडर और CEO नवनीत डागा का कहना है कि EV और चार्जर पर GST तो 5 फीसदी है, लेकिन अहम कंपोनेंट्स पर ज्यादा टैक्स होने से लागत असंतुलन पैदा हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि GST दरों को एकसमान किया जाए और PM e-Drive जैसी स्कीमों का दायरा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक बढ़ाया जाए, जिससे EV इकोसिस्टम मजबूत हो सके।

Deloitte India के पार्टनर रजत महाजन ने कहा कि अभी टैक्स सिस्टम ऐसा है कि कंपनियां कच्चे माल और पार्ट्स पर ज्यादा टैक्स देती हैं, लेकिन तैयार EV बेचते समय कम टैक्स वसूल पाती हैं। इससे कंपनियों के पास रोज़मर्रा के खर्च, निवेश और उत्पादन के लिए पैसे की कमी हो जाती है । सितंबर 2025 में ऑटो पार्ट्स पर GST 28% से घटाकर 18% कर दिया गया, लेकिन EV पर अभी भी सिर्फ 5% GST लगता है। मौजूदा टैक्स सिस्टम की वजह से EV कंपनियों का पैसा अटका रहता है और गाड़ी बनाना महंगा पड़ रहा है। इंडस्ट्री का मानना है कि GST सुधार, बैटरी पर ड्यूटी राहत और चार्जिंग नेटवर्क के लिए टारगेटेड इंसेंटिव भारत को 2030 तक 30 फीसदी EV अपनाने के लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

फरवरी 2026 में Tata EV पर डिस्काउंट की बरसात, 3.8 लाख रुपये तक की बंपर छूट

नई दिल्ली: Tata Motors ने अपनी इलेक्ट्रिक कार रेंज पर फरवरी में जबरदस्त डिस्काउंट की घोषणा की है। कंपनी की नई इकाई Tata Passenger Electric Mobility Ltd (TPEML) के तहत Tata की लगभग सभी EVs पर छूट मिल रही है, जिसमें Tiago EV, Punch EV, Nexon EV, Harrier EV और Curvv EV शामिल हैं। इन छूटों का फायदा ₹30,000 से लेकर ₹3.8 लाख तक मिल सकता है, जो मॉडल और मैन्युफैक्चरिंग ईयर पर निर्भर करता है।

Tata Curvv EV पर सबसे ज्यादा डिस्कांउट मिल रहा है। फरवरी 2026 में Curvv EV पर 3.8 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। Creative 45 वेरिएंट को MY24 और MY25 मॉडल्स पर 3.3 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है, जबकि बाकी वेरिएंट्स पर MY24 और MY25 में पूरे 3.8 लाख रुपये तक का फायदा दिया जा रहा है। MY26 Curvv EV पर भी 3.3 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है।

Tata की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार Tiago EV भी अच्छे डिस्काउंट के साथ उपलब्ध है। MY24 और MY25 मॉडल्स पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है, जबकि MY26 मॉडल पर 60,000 रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। यह छूट सभी वेरिएंट्स पर लागू है, जिससे शहर में चलाने के लिए Tiago EV और भी किफायती बन गई है।

MY24 और MY25 Punch EV पर 1.6 लाख रुपये तक, जबकि MY26 मॉडल पर 90,000 रुपये तक की छूट मिल रही है। Punch EV का फेसलिफ्ट 20 फरवरी 2026 को लॉन्च होने वाला है, ऐसे में मौजूदा मॉडल पर भारी डिस्काउंट दिया जा रहा है।
Nexon EV पर भी आकर्षक ऑफर मौजूद हैं। MY24 और MY25 Nexon EV पर 1.2 लाख रुपये तक, जबकि नए MY26 मॉडल पर सिर्फ 30,000 रुपये तक की छूट मिल रही है। यह छूट सभी वेरिएंट्स पर समान रूप से लागू है।

वहीं, Tata की फ्लैगशिप इलेक्ट्रिक SUV Harrier EV पर भी ₹1.5 लाख तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। Harrier EV ही एकमात्र MY26 मॉडल है, जिस पर लॉयल्टी बोनस भी मिल रहा है। यह छूट सभी वेरिएंट्स पर समान है।

यूरोप में इलेक्ट्रिक कारों का धमाका : पेट्रोल कारों से आगे निकली EV, बिक्री 51% बढ़ी

नई दिल्ली: यूरोपियन यूनियन (EU) में ऑटोमोबाइल इतिहास का एक बड़ा मोड़ आ गया है। दिसंबर 2025 में पहली बार इलेक्ट्रिक कारों (EV) की बिक्री पेट्रोल कारों से ज्यादा हो गई। यह जानकारी यूरोपियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन (ACEA) की नई रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 में EU में करीब 2,17,898 बैटरी इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर हुईं, जो पिछले साल के मुकाबले 51% ज्यादा हैं। पेट्रोल कारों की बिक्री घटकर 2,16,492 यूनिट रह गई, जो सालाना आधार पर करीब 19% की गिरावट दर्शाती है।

2025 में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 17.4% हो गई, जो 2024 में 13.6% थी। सबसे ज्यादा EV बिक्री जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम और फ्रांस में हुई, जो कुल EV रजिस्ट्रेशन का करीब 62% हिस्सा रहे। पेट्रोल कारें अब भी बड़ी संख्या में बिक रही हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है। 2025 में पेट्रोल कारों की कुल बिक्री करीब 28.8 लाख यूनिट रही, और बाजार हिस्सेदारी घटकर 26.6% रह गई।

हाइब्रिड कारें पेट्रोल या डीजल से चलती हैं और छोटी बैटरी होती है अभी भी EU में सबसे ज्यादा बिकने वाला सेगमेंट हैं। इनकी बिक्री में 5.8% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन प्लग-इन हाइब्रिड और पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री इससे कहीं तेज गति से बढ़ रही है। EU सरकारें भी साफ-सुथरी गाड़ियों को बढ़ावा देने की नीति बना रही हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार 2035 तक कारों से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन में 90% कटौती का लक्ष्य रखा गया है। इससे पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर दबाव बढ़ेगा, हालांकि हाइब्रिड और कुछ पारंपरिक इंजन गाड़ियों को भी आगे चलकर जगह मिल सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि Volkswagen EU में सबसे बड़ी कार कंपनी बनी हुई है, जबकि Tesla की हिस्सेदारी घट गई है। वहीं, चीन की BYD कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। यह आंकड़े बताते हैं कि यूरोप तेजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर बढ़ रहा है और आने वाले सालों में पेट्रोल कारों का दौर धीरे-धीरे कम होता जा सकता है।

नवंबर 2025 : EV मार्केट में MG और Mahindra को पछाड़कर TATA MOTORS बनी नंबर वन

नई दिल्ली: Tata Motors ने नवंबर 2025 में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बिक्री में बाज़ी मार ली है। FADA (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस) के आंकड़ों के अनुसार, Tata ने नवंबर 2025 में 6,153 यूनिट्स बेचीं, जबकि पिछले साल इसी महीने में 4,489 यूनिट्स बिकी थीं। साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ 38 प्रतिशत रही। हालांकि, अक्टूबर 2025 में टाटा ने 7,239 यूनिट्स बेची थीं, इसलिए नवंबर में महीने-दर-महीने (MoM) बिक्री में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई। इस साल त्योहारों का सीजन लंबा चला, जिससे सितंबर और अक्टूबर में कई निर्माता अच्छे बिक्री आंकड़े देखने को मिले।

MG दूसरे नंबर पर रही और उसने नवंबर में 3,693 यूनिट्स बेचीं। महिंद्रा तीसरे स्थान पर रही, जिसने 2,956 यूनिट्स बेचीं। MG का साल-दर-साल ग्रोथ 10.3 प्रतिशत और महिंद्रा का ग्रोथ 408.7 प्रतिशत रहा। महिंद्रा का ग्रोथ खासतौर पर ज्यादा है क्योंकि पिछले साल नवंबर में उसने XEV 9e और BE 6 की बिक्री शुरू नहीं की थी। महिंद्रा की ग्रोथ इतनी अधिक इसलिए रही क्योंकि पिछले साल नवंबर में उसने अपने XEV 9e और BE 6 मॉडल्स की बिक्री शुरू नहीं की थी। अब महिंद्रा के कुल इलेक्ट्रिक वाहन लाइनअप में XUV400, XEV 9e, BE 6 और हाल ही में लॉन्च हुई XEV 9S शामिल हैं।

Tata Motors के पास छह इलेक्ट्रिक कारें हैं, जो लगभग 20 लाख रुपये तक की कीमत में आती हैं। टाटा ने अपने ग्राहकों को लगभग हर बजट और जरूरत के लिए विकल्प दिए हैं। इस लाइनअप में जल्द ही Sierra EV भी शामिल होने वाली है, जिसकी लॉन्चिंग FY26 की आखिरी तिमाही में होने की उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि Sierra EV की एंट्री के बाद टाटा की पकड़ EV मार्केट में और मजबूत हो जाएगी। टाटा ने इस साल भी EV सेगमेंट में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। MG और महिंद्रा जैसे प्रतियोगियों के बावजूद टाटा ने न केवल बिक्री में बढ़त हासिल की है, बल्कि अपने विस्तृत मॉडल रेंज और कीमतों की विविधता के कारण ग्राहकों को बेहतर विकल्प भी दिया है।

Mahindra की 7 महीनों में 30,000 इलेक्ट्रिक SUV की बिक्री, हर 10 मिनट में बिकी एक कार

नई दिल्ली: ठीक एक साल पहले Mahindra ने सिर्फ दो इलेक्ट्रिक SUVs लॉन्च नहीं की थीं, बल्कि इंडिया के ऑटोमोबाइल इतिहास में एक नया अध्याय लिखने का वादा किया था। आज वही वादा सुर्खियों में बदल चुका है। देश की EV कहानी को नई दिशा देने वाली ये दो दमदार गाड़ियां, Mahindra XEV 9e और Mahindra BE 6 अब इंडियन सड़कों पर क्रांति का दूसरा नाम बन चुकी हैं। सिर्फ 7 महीनों में 30,000 से ज्यादा Electric Origin SUVs बिक चुकी है। औसतन हर 10 मिनट में एक गाड़ी की बिक्री हुई।

लॉन्च के साथ ही इन दोनों SUVs ने तहलका मचा दिया। 4 अरब से ज्यादा व्यूज़ के साथ ये साल की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली भारतीय गाड़ियां बनीं। लग्ज़री कार प्रेमियों से लेकर उद्योग जगत के दिग्गजों और बड़े सरकारी अधिकारियों तक, हर वर्ग ने गर्व से “मेड-इन-इंडिया” Electric Origin SUV को चुना, जो लुक में ग्लोबल, एहसास में वर्ल्ड-क्लास है। इस एक साल में Mahindraने वो कर दिखाया जो इंडिया में कोई EV ब्रांड नहीं कर सका। Mahindra ने इलेक्ट्रिक को सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि स्टेटस और लाइफस्टाइल बना दिया।

वित्तीय वर्ष 2026 की पहली छमाही में Mahindra Electric ने मार्केट शेयर में नंबर-1 का मुकाम हासिल किया और 8,000 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू दर्ज किया। 65% गाड़ियां हर कामकाजी दिन चल रही हैं। ये अब ‘वीकेंड कार’ नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुकी हैं। 1,000 से ज्यादा SUVs 20,000 किमी का आंकड़ा पार कर चुकी हैं और कुल मिलाकर ग्राहक 200 मिलियन किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुके हैं।

लद्दाख की कड़ाके की ठंड से लेकर थार की तपती गर्मी (4°C से 53°C) तक, ये गाड़ियाँ हर मौसम में खरी उतरी हैं। 30% मालिकों ने एक ही दिन में 400 किमी की यात्रा की, कई ने राज्यों की सीमाएं पार कीं और कुछ तो 10 राज्यों तक पहुंच गए। 80% ग्राहक पहले कभी Mahindraके नहीं थे। BE 6 तो अब एक कल्ट आइकन बन चुकी है। कस्टम पेंट, मॉड्स और सोशल मीडिया पर छाई हुई। BGMI और Batman जैसी साझेदारियों के साथ Mahindra अब सिर्फ खेल खेल ही नहीं रही है, बल्कि खेल बदल रही है।

MG के विंग्स में बिजली का तूफान, हर तीन में से एक कार अब इलेक्ट्रिक, 1 लाख EV बेचकर रचा इतिहास

गुरुग्राम: JSW MG Motor India ने देश में 1 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री कर नया इतिहास रचा है। इस उपलब्धि के साथ कंपनी इंडिया की दूसरी 4-व्हीलर EV निर्माता कंपनी बन गई है, जिसने 1 लाख ईवी की बिक्री की है।

MG Motor India का EV मार्केट शेयर 2024 के 26% से बढ़कर 2025 में 35% तक पहुंच गया है। कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहनों ने अब कुल मासिक बिक्री में 70% से अधिक योगदान देना शुरू कर दिया है। कंपनी के लोकप्रिय इलेक्ट्रिक मॉडल्स MG ZS EV, MG Comet, और हाल ही में लॉन्च MG Windsor (इंटेलिजेंट CUV) को ग्राहकों ने खासतौर से पसंद किया है। Comet को खासतौर पर “स्ट्रीट-स्मार्ट कार” के रूप में युवा वर्ग के बीच बड़ी लोकप्रियता मिली है।

JSW MG Motor India का ‘MG Charge’ प्रोजेक्ट देशभर में 1000 दिनों में 1000 चार्जिंग स्टेशन लगाने के मिशन पर काम कर रहा है। ‘Battery-as-a-Service’ मॉडल से EV खरीदने की लागत घटाई गई है। ‘Project Revive’ के तहत इस्तेमाल की गई बैटरियों को रीसायकल और री-यूज करने की योजना चल रही है। कंपनी ने साथ ही ‘eHub by MG’ ऐप लॉन्च किया है, जो यूज़र्स को नज़दीकी चार्जिंग स्टेशन ढूंढने, स्लॉट बुक करने और चार्जिंग हिस्ट्री ट्रैक करने की सुविधा देता है।

गुजरात के हालयोल प्लांट में MG की सालाना उत्पादन क्षमता 1 लाख वाहनों से अधिक है और यह 6,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। कंपनी अब आने वाले समय में हाइब्रिड और नेक्स्ट-जेन बैटरी टेक्नोलॉजी पर भी फोकस कर रही है। ब्रिटेन में स्थापित Morris Garages (MG) आज सौ साल की विरासत के साथ एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है। MG ने भारत की पहली इंटरनेट SUV – MG Hector, पहली ऑटोनॉमस (Level-1) प्रीमियम SUV – MG Gloster, पहली AI असिस्टेंट वाली SUV – MG Astor और पहली प्योर इलेक्ट्रिक इंटरनेट SUV – MG ZS EV दी है।

सितंबर EV सेल्स : 15,000 से ज्यादा E-कारों की बिक्री, सालाना ग्रोथ ने तोड़ा रिकॉर्ड

नई दिल्ली: सितंबर 2025 में इंडिया की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट ने मिला-जुला परफॉर्मेंस दिखाया। कुछ सेगमेंट्स में हल्की मासिक गिरावट रही, तो कुछ में अच्छी-खासी सालाना ग्रोथ रही। JMK रिसर्च & एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार 1,04,056 यूनिट्स की बिक्री के साथ हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री में मामूली 0.24% की मासिक गिरावट देखी।, मार्केट का बड़ा हिस्सा तीनों टॉप ब्रैंड्स के हाथ में है। कुल 58% रजिस्ट्रेशन उन्हीं के नाम है। सितंबर में ई-कार सेगमेंट में सबसे चमकदार परफॉर्मेंस रही ! कुल 15,048 यूनिट्स की बिक्री हुई। मासिक गिरावट 13% रही, लेकिन 160 फीसदी की सालाना ग्रोथ हुई। Tata Motors ने फिर एक बार बाज़ी मारते हुए लगभग 40% मार्केट शेयर के साथ लीडिंग पोज़िशन बरकरार रखी।

पैसेंजर E3W ने सितंबर 2025 में 52,564 यूनिट्स की बिक्री के साथ यह सेगमेंट थोड़ा कमजोर रहा – अगस्त की तुलना में लगभग 4% की गिरावट आई। सालाना आधार पर भी 6.6% कम। मार्केट शेयर की बात करें तो टॉप 8 खिलाड़ी कुल मिलाकर 45% हिस्सेदारी संभाले हुए हैं, यानी मार्केट में मुकाबला अभी भी कड़ा है।” कार्गो E3W में 8,465 यूनिट्स की बिक्री के साथ मासिक स्तर पर केवल 1% की हल्की गिरावट देखी गई। सालाना 28% की बढ़त। टॉप 8 खिलाड़ियों का शेयर 36%, यानी मार्केट में अभी भी मुकाबला कड़ा है।

सितंबर में ई-बस की 346 यूनिट्स की बिक्री के साथ 12% की मासिक गिरावट और 13% की सालाना गिरावट आई। सितंबर 2025 में EV मार्केट ने दिखाया कि भले ही कुछ सेगमेंट्स में मासिक कमी आई, लेकिन सालाना ग्रोथ जबर्दस्त रही । ई-कार और कार्गो E3W में सालाना रिकॉर्ड्स टूट रहे हैं, E2W और E3W में मुकाबला कड़ा है।

2026 से इलेक्ट्रिक गाड़ियां नहीं रहेंगी खामोश, पैदल चलने वालों से कहेंगी-ऐ भाई, जरा देखकर चलो

नई दिल्ली: क्या कभी किसी इलेक्ट्रिक गाड़ी के पास से गुजरते हुए चौक गए हैं क्योंकि आपको उसकी आवाज सुनाई नहीं दी? इलेक्ट्रिक गाड़ियों का खामोश होना कई बार पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए खतरा बन जाता है। अब इसी खतरे को कम करने के लिए भारत सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने हाल ही में एक ड्राफ्ट नियम जारी किया है, जिसके तहत M और N कैटेगरी की सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ‘अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम’ (AVAS) लगाना अनिवार्य होगा। अब आपकी खामोश इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी हल्की आवाज निकालेंगी, ताकि आसपास के लोग सतर्क हो सकें।

EVs इंजन की आवाज़ नहीं करते, इसलिए कम स्पीड पर ये लगभग चुपचाप चलते हैं।
यह सुविधा अच्छी है, लेकिन पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और दृष्टिहीन लोगों के लिए खतरा बन सकती है। AVAS वाहन की गति के हिसाब से धीर-धीरे आवाज़ निकालता है। 20 किमी/घंटा से कम चलने पर और रिवर्स मोड में खुद-ब-खुद चालू हो जाता है। ज्यादा तेज़ी से चलने पर सिस्टम ऑफ हो जाता है, क्योंकि टायर और हवा की आवाज़ काफी होती है।

यह सिस्टम नोटिफिकेशन के अनुसार, इस नियम को दो चरणों में लागू किया जाएगा। 1 अक्टूबर, 2026 से बाजार में आने वाले M और N कैटेगरी के सभी नए इलेक्ट्रिक वाहनों में AVAS सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. मौजूदा मॉडल की इलेक्ट्रिक गाड़ियां: जो इलेक्ट्रिक गाड़ियां पहले से बाजार में हैं या उनके पुराने मॉडल बन रहे हैं, उनके लिए 1 अक्टूबर, 2027 से ये नियम लागू होगा. यानी, वाहन निर्माताओं को एक साल का अतिरिक्त समय मिलेगा ताकि वे अपने मौजूदा मॉडलों में इस सिस्टम को जोड़ सकें. फिलहाल इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीनपहिया और ई-रिक्शा इस नियम में शामिल नहीं हैं।

यूरोप, जापान और अमेरिका में EVs और हाइब्रिड वाहनों में यह सिस्टम पहले से अनिवार्य है। इंडिया में कुछ EV मॉडल Tata Curvv EV, Hyundai Creta Electric, Mahindra XEV 9e, Mahindra BE 6 पहले ही इसका उपयोग कर रहे हैं।