इंडिया बनेगा ऑटो पार्ट्स का किंग, एक्सपोर्ट 23 अरब डॉलर पार : Avendus Capital

नई दिल्ली: Avendus Capital की नई रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का ऑटो कंपोनेंट मेटल फॉर्मिंग बाजार FY30 तक बढ़कर 90–95 अरब डॉलर (करीब 7.5–8 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। करीब 12% सालाना ग्रोथ के साथ यह सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इंडिया अब ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बनता जा रहा है।

इंडिया में गाड़ियों के पार्ट्स बनाने वाला “मेटल फॉर्मिंग” सेक्टर आने वाले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ेगा। भारत अब सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दुनिया की कंपनियों के लिए भी बड़े पैमाने पर पार्ट्स बना रहा है। भारत अब बाहर से कम खरीदता है, बल्कि ज्यादा सामान विदेश भेज रहा है एक्सपोर्ट करीब 23 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

इन्वेस्टमेंट बैंक Avendus Capital की रिपोर्ट बताती है कि ऑटो इंडस्ट्री में काम करने का तरीका बदल रहा है। पहले कंपनियां हर तरह के अलग-अलग पार्ट्स बनाती थीं, लेकिन अब ज्यादा वैल्यू उन कंपनियों को मिल रही है जो किसी एक काम (जैसे कास्टिंग, फोर्जिंग, मशीनिंग) में एक्सपर्ट “हर काम थोड़ा-थोड़ा” करने वाली कंपनियों से ज्यादा आगे अब वही बढ़ेंगी जो “एक काम में माहिर” हैं।

Avendus Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर कौशिक भट्टाचार्य का कहना है कि अब सिर्फ ज्यादा उत्पादन करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी, क्वालिटी और एक्सपर्टीज ही असली ताकत होगी। भारत का ऑटो पार्ट्स सेक्टर FY25 में यह 80 अरब डॉलर पार कर चुका है। दुनिया की बड़ी कंपनियां अब सिर्फ चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। अब भारत सस्ता, कुशल इंजीनियरों वाला और मजबूत सप्लाई सिस्टम वाला देश होने के कारण तेजी से “मैन्युफैक्चरिंग हब” बन रहा है।

अब विदेश की कंपनियां भारत में ज्यादा काम करवाना चाहेंगी। इससे देश में बिजनेस और नौकरियां दोनों बढ़ेंगी। गाड़ियों के जरूरी मेटल पार्ट्स (जैसे कास्टिंग, फोर्जिंग, मशीनिंग) का काम खत्म नहीं होने वाला। चाहे पेट्रोल-डीजल गाड़ी (ICE) हो या इलेक्ट्रिक (EV), दोनों में ये पार्ट्स जरूरी रहेंगे। अब हल्के, मजबूत और ज्यादा सटीक पार्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। दुनिया में अभी भी 1.5 अरब से ज्यादा पेट्रोल-डीजल गाड़ियां चल रही हैं, जिनके पार्ट्स की रिप्लेसमेंट की मांग सालों तक बनी रहेगी।

इंडिया ऑटो पार्ट्स बनाने में दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बनने की तरफ बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर तेजी से बढ़ेगा और भारत की पकड़ ग्लोबल बाजार में और मजबूत होगी।

ऑटो बाजार में धमाका! फरवरी 2026 में 24 लाख से ज्यादा गाड़ियां बिकीं: FADA

नई दिल्ली: इंडिया के ऑटो रिटेल सेक्टर के लिए फरवरी 2026 का महीना बेहद शानदार रहा। देशभर में कुल 24,09,362 वाहनों की खुदरा बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुकाबले 25.62% ज्यादा है। ऑटो डीलर्स की शीर्ष संस्था Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह अब तक का सबसे बेहतरीन फरवरी रहा, जिसमें टू-व्हीलर, पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल, थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टर जैसे लगभग सभी सेगमेंट में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली।

FADA की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 में टू-व्हीलर (2W) की बिक्री 17,00,505 यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 25.02% की बढ़त दर्शाती है। इसी तरह पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में 3,94,768 यूनिट की बिक्री हुई, जो 26.12% की वृद्धि है। कमर्शियल व्हीकल (CV) की बिक्री भी मजबूत रही और यह 1,00,820 यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 28.89% अधिक है।
वहीं थ्री-व्हीलर (3W) की बिक्री 1,17,130 यूनिट रही, जिसमें 24.39% की बढ़त दर्ज की गई। सबसे तेज वृद्धि ट्रैक्टर सेगमेंट में देखी गई, जहां 89,418 यूनिट की बिक्री के साथ 36.35% की शानदार ग्रोथ दर्ज हुई। हालांकि कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (CE) सेगमेंट में थोड़ी गिरावट आई और इसकी बिक्री 6,721 यूनिट रही, जो 1.22% कम है।

FADA के मुताबिक फरवरी की मजबूत बिक्री का सबसे बड़ा कारण GST 2.0 के बाद बाजार में भरोसा बढ़ना रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने से भी ऑटो सेक्टर को काफी मजबूती मिली। टू-व्हीलर बाजार में शहरी बिक्री 28.96% और ग्रामीण बिक्री 22.16% बढ़ी। वहीं पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में ग्रामीण बाजार 34.21% की ग्रोथ के साथ शहरों (21.12%) से आगे निकल गया। SUV की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ रही है।

कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में फ्रेट मूवमेंट, ई-कॉमर्स गतिविधियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से अच्छी मांग बनी हुई है। वहीं ट्रैक्टर की तेज बिक्री ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देती है।पैसेंजर व्हीकल का स्टॉक घटकर 27 से 29 दिन के स्तर पर आ गया है। मार्च 2026 के लिए करीब 75.51% डीलर्स को बिक्री बढ़ने की उम्मीद है जबकि केवल 4.59% डीलर्स गिरावट की आशंका जता रहे हैं। हालांकि अगले तीन महीनों में बाजार तेज उछाल से स्थिर वृद्धि के चरण में जाने की ओर बढ़ सकता है। कुल मिलाकर ऑटो रिटेल सेक्टर का माहौल अभी भी सावधानी के साथ सकारात्मक बना हुआ है।

ग्रीन मोलिबिटी के बॉस चंडीगढ़ और गोवा के साथ अब दिल्ली बनी EV रॉकस्टार : CEEW

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs)को अपनाने के मामले में टॉप 3 में शामिल हो गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में EVs की बिक्री में Chandigarh पहले नंबर पर है (12.1% EVs), और Goa दूसरे नंबर पर (11.9% EVs) रहा।

पूरे देश में EV खरीदने वाले लोगों की तादाद 7.49% थी। राष्ट्रीय औसत के मुकाबले दिल्ली, Chandigarh और Goa में EVs अपनाने की दर बहुत तेज़ है। जिन राज्यों में सरकार अच्छी नीतियां और प्रोत्साहन देती है, वहां लोग इलेक्ट्रिक वाहन जल्दी अपनाते हैं। हाल ही में Council on Energy, Environment and Water (CEEW) की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिल्ली में EVs की हिस्सेदारी 11.6% तक पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि स्थानीय प्रोत्साहन और स्पष्ट नीतियां इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की रफ्तार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

दिल्ली में वित्तीय वर्ष में 83,423 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर किए गए। यहां इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ तीन-पहिया रिक्शा या ऑटो तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दो-पहिया बाइक, तीन-पहिया ऑटो और सार्वजनिक बस सेवा तक फैल चुके हैं। दिल्ली में लगभग 40% बसें इलेक्ट्रिक हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। दिल्ली स्मार्ट और हरित (ग्रीन) परिवहन अपनाने में आगे है। दिल्ली ने इलेक्ट्रिक वाहनों में बसें, ऑटो, बाइक सब को शामिल कर लिया है। इससे राजधानी देश में ग्रीन ट्रांसपोर्ट की मिसाल बना।

रिपोर्ट के लिए Vahan पोर्टल का डेटा इस्तेमाल किया गया है, जो सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा vehicle sales (वाहनों की बिक्री) को ट्रैक करता है। CEEW (Council on Energy, Environment and Water) ने Vahan पोर्टल से मिले डेटा को देखा, समझा और जांचा। यह तय किया कि कौन सा शहर कितने इलेक्ट्रिक वाहन अपना रहा है, और आंकड़े कितने सही और भरोसेमंद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली का यह कदम इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और प्रदूषण घटाने में एक बड़ा संकेत है लोग अब साफ-सुथरी और टिकाऊ यात्रा के विकल्प अपना रहे हैं। दिल्ली ने EV अपनाने में तेजी दिखाई है, और यह देश के अन्य शहरों के लिए हरित वाहन नीति का मॉडल बन सकती है। Chandigarh और Goa के साथ दिल्ली टॉप 3 में शामिल होकर इलेक्ट्रिक परिवहन क्रांति में आगे बढ़ रही है।

नवंबर 2025 में ऑटो रिटेल ने पकड़ी रफ्तार, फेस्टिवल के बाद भी मांग बरकरार : FADA

नई दिल्ली: FADA ने नवंबर 2025 की वाहन रिटेल रिपोर्ट जारी की है, जो बताती है कि फेस्टिव सीज़न के बाद भी ऑटो रिटेल की रफ्तार कायम है। इस महीने कुल रिटेल बिक्री साल-दर-साल 2.14% बढ़ी। नवंबर 2024 में दिवाली के तुरंत बाद भारी रजिस्ट्रेशन हुए थे। इसके उलट इस बार अक्टूबर में ही दिवाली पड़ जाने की वजह से फेस्टिव डिलीवरी पिछले महीने हो चुकी थी। फिर भी नवंबर में मांग बनी रहना इंडस्ट्री के लिए पॉज़िटिव संकेत माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार दोपहिया वाहन बिक्री 3.1 फीसदी घट गई क्योंकि रिटेल का बड़ा हिस्सा अक्टूबर में शिफ्ट हो गया था। जीएसटी 2.0 के कट, लगातार मिल रहे ऑफर्स और ग्रामीण बाज़ार से आती पूछताछ ने इस सेगमेंट को सहारा दिया। पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट ने जबरदस्त 19.7% की बढ़ोतरी दर्ज की। बेहतर मॉडल उपलब्धता, कॉम्पैक्ट SUVs की मजबूत डिमांड और साल के अंत में मिलने वाले डिस्काउंट्स ने इस ग्रोथ को और तेज़ किया। कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी 19.94% की तेज़ बढ़त देखी गई। तीन पहिया वाहनों की बिक्री 23.67% बढ़ी। ट्रैक्टरों की मांग 56.55% उछली। कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेगमेंट में 16.5% की गिरावट दर्ज की गई।

FADA ने निकट भविष्य को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। रबी की बुवाई 39.3 मिलियन हेक्टेयर को पार कर गई है, जो इस बार किसानों की आय और ग्रामीण खर्च में मजबूती का संकेत देती है। इसके साथ ही सामान्य से ज्यादा ठंडी सर्दियों का अनुमान लगाया गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स और मौसमी मोबिलिटी में बढ़ोतरी की उम्मीद है। एफएमसीजी, ट्रैक्टर और दोपहिया सेगमेंट में ग्रामीण खपत की वापसी के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं। GST 2.0 सुधारों और लगातार जारी उपभोक्ता स्कीमों के कारण दिसंबर में भी मांग के टिके रहने की उम्मीद है।

अगले तीन महीनों को लेकर 74% डीलर्स ने ग्रोथ का अनुमान जताया है। उनका कहना है कि 2026 की नई लॉन्चिंग्स, शादी-ब्याह का सीज़न और फसलों से मिलने वाली नकदी बाज़ार में नई जान डालेंगे। हालांकि मॉडल-ईयर चेंज और फेस्टिव ट्रिगर्स के न होने से हल्की सुस्ती भी आ सकती है। ‘वन नेशन, वन टैक्स’ और ‘विकसित भारत 2047’ जैसे विज़न affordable mobility को अगले स्तर पर ले जा सकते हैं।

ऑटो डीलर्स की राय: JSW MG, Royal Enfield और Ashok Leyland बने डीलर संतुष्टि में नंबर 1

नई दिल्ली: फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने अपने वार्षिक डीलर संतुष्टि अध्ययन (DSS) 2025 के नतीजे जारी कर दिए हैं। यह अध्ययन ऑटोमोबाइल डीलरों और वाहन बनाने वाली कंपनियों (OEMs) के बीच संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। इस साल के सर्वे में JSW MG मोटर (4-पहिया यात्री वाहन), Royal Enfield (2-पहिया वाहन), Ashok Leyland (कमर्शियल वाहन), Atul Auto (3-पहिया वाहन) और Volvo Cars (लक्जरी कारें) को उनके सेगमेंट में डीलर संतुष्टि के मामले में सबसे अच्छा पाया गया है।

डीलर संतुष्टि पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ

FADA के अध्यक्ष, श्री सी. एस. विग्नेश्वर ने बताया कि इस साल का सर्वे पहले से कहीं ज़्यादा बड़ा और गहरा था। इसमें देश भर के 1,800 से अधिक डीलरों से नौ अलग-अलग भाषाओं में प्रतिक्रिया ली गई, ताकि जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझा जा सके। विग्नेश्वर ने इस बात पर जोर दिया कि जहाँ एक ओर भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग बेहतरीन क्वालिटी के वाहन बना रहा है, वहीं डीलरों के मुनाफे और नीतियों से जुड़ी समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। डीलर्स को GST में राहत मिलने के बाद, उनकी मांग है कि कंपनियां भी उनके लिए उचित मार्जिन, बेहतर नीतियां और फैसलों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करें, खासकर आने वाले त्योहारी सीज़न से पहले।

प्रेमोनएशिया के निदेशक और सीओओ राहुल शर्मा ने भी डीलरों की चिंताओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि सर्वे में 66% डीलरों की असंतुष्टि का कारण ‘बिक्री के बाद की सेवा’ और ‘व्यापार में लाभ’ से जुड़े मुद्दे हैं। इन मुद्दों में इन्वेंट्री का खर्च, वापस नहीं बिकने वाले माल की नीतियां और ट्रेनिंग के लिए पैसों का बंटवारा शामिल है। शर्मा का मानना है कि कंपनियों को डीलरों के साथ मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो कंपनी के मानकों और डीलरों की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखें।

सेगमेंट-वार प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण

4-पहिया यात्री वाहन (4W Mass): JSW MG 868 अंकों के साथ लगातार टॉप पर बना हुआ है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने डीलरों के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते बनाए रखने में कामयाब रही है।
2-पहिया वाहन (2W): रॉयल एनफील्ड ने 852 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि हीरो मोटोकॉर्प भी दूसरे स्थान पर रहा। इन दोनों कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में अपने स्कोर में 140 से अधिक अंकों का सुधार किया है, जो उद्योग में सबसे बड़ा सुधार है। इससे पता चलता है कि वे अपने डीलरों की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं।
वाणिज्यिक वाहन (CV): अशोक लीलैंड ने 786 अंकों के साथ अपनी लीडरशिप बनाए रखी, जबकि टाटा मोटर्स CV ने भी अच्छा सुधार दिखाया। डीलर्स इन कंपनियों के उत्पादों की विश्वसनीयता और समय पर वाहनों की आपूर्ति को सराहते हैं।
3-पहिया वाहन (3W): तीन साल बाद इस सेगमेंट को सर्वे में शामिल किया गया, और अतुल ऑटो ने 924 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन किया।
लक्ज़री कारें (4W Luxury): वोल्वो कार्स 884 अंकों के साथ इस श्रेणी में सबसे आगे रही।

चुनौतियाँ और सुझाव

सर्वे में यह भी पाया गया कि चार पहिया यात्री वाहन और कमर्शियल वाहन के डीलरों की संतुष्टि पिछले साल की तुलना में कम हुई है। वे मुख्य रूप से मुनाफे की कमी, ट्रेनिंग के खर्च, और बिना बिके माल को वापस लेने की नीतियों को लेकर चिंतित हैं। डीलर्स चाहते हैं कि कंपनियों को इन मुद्दों पर अधिक स्पष्ट और सहायक होना चाहिए ताकि वे लंबे समय तक व्यापार में बने रह सकें। कुल मिलाकर, यह सर्वे एक महत्वपूर्ण संदेश देता है: ग्राहकों को अच्छी गाड़ियां देना काफी नहीं है, बल्कि कंपनियों को अपने डीलरों के साथ भी एक मजबूत और सहायक साझेदारी बनानी होगी ताकि पूरा इकोसिस्टम सही से काम कर सके।

जुलाई 2025 में ऑटो बाजार पर बारिश की मार, ट्रैक्टर बना हीरो : FADA

नई दिल्ली: बरसात की बूंदें जहां किसानों के लिए राहत बनीं, वहीं ऑटो बाज़ार के कुछ हिस्सों के लिए ब्रेक। जुलाई 2025 के ऑटो रिटेल डेटा के अनुसार कुल बिक्री में 4.31% की गिरावट दर्ज हुई है, और महीने-दर-महीने भी रफ्तार करीब 2% धीमी रही। त्योहारों की दस्तक के साथ अगस्त में उछाल की पूरी संभावना दिख रही है। इंडिया में Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) ने जुलाई 2025 के लिए वाहनों की रिटेल बिक्री (डीलरशिप से सीधे ग्राहकों को बेची गई गाड़ियों) के आंकड़े जारी किए हैं। FADA की रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडिया में जुलाई 2025 में कितनी गाड़ियां बिकीं, किस सेगमेंट में कितनी बिक्री हुई।

गांवों में लगातार बारिश और खेतों में बढ़ते काम ने टू-व्हीलर की बिक्री को बड़ा झटका दिया। ऊपर से खरीदारों ने भी फैसला टाल दिया। उनका सोचना था कि अब तो अगस्त में ही खरीदेंगे, जब त्योहार आएंगे। इससे जुलाई की बिक्री में 6.48% की सालाना गिरावट और 6.28% की मासिक गिरावट आई। शहरों में ग्राहक शोरूम में पहुंचे तो सही, लेकिन मन नहीं बना। गांवों में आषाढ़ जैसे शुभ मौकों पर बिक्री थोड़ी बढ़ी। सालाना बिक्री में 0.81% की गिरावट पर महीने-दर-महीने 10.38% की रिकवरी भी दिखी।

केवल थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने जुलाई में संतुलन बनाए रखा। 0.83% की सालाना बढ़त और
 10.73% की मासिक उछाल ने उम्मीद दी। शहरों में नए मॉडल्स, स्कूल बस खरीद और इंस्टिट्यूशनल ऑर्डर्स ने CV सेगमेंट को थोड़ी रफ्तार दी। सालाना 0.23% की हल्की सी ग्रोथ दर्ज हुई।

जहां बाकी सेगमेंट धीमे थे, ट्रैक्टर की जोरदार बिक्री हुई। सरकारी सब्सिडी, मूसलाधार बारिश और गांवों में नकदी का बहाव – तीनों ने मिलकर ट्रैक्टर की बिक्री को आसमान पर पहुंचा दिया। 10.96% की शानदार सालाना ग्रोथ रही और 14.9% की महीने दर महीने छलांग लगाई। फेस्टिव सीजन की शुरुआत, मॉनसून की मजबूती और सरकारी स्कीम्स अगस्त में ऑटो सेक्टर की बिक्री को नई रफ्तार दे सकते हैं।

इंडियन नट-बोल्ट्स का धमाका, भारत बना ग्लोबल ऑटो स्पेयर पार्ट्स का पावरहाउस : ACMA

नई दिल्ली : अब सिर्फ कारें और एससूवी ही सड़कों पर नहीं दौड़ रहीं है, उनके कंपोनेंट्स और पार्ट्स भी कमाई के ट्रैक पर फर्राटा भर रहे हैं। इंडिया की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने 2024-25 में 6.73 लाख करोड़ रुपये का जबरदस्त टर्नओवर दर्ज किया है। क्लच, ब्रेक, स्टीयरिंग और सस्पेंशन अब सिर्फ कार चलाने के काम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ACMA (Automotive Component Manufacturers Association of India) की रिपोर्ट के अनुसार FY20 से FY25 के बीच इंडस्ट्री ने 14% की CAGR ग्रोथ दर्ज की। पिछले 5 वर्षों में इंडस्ट्री लगभग दोगुनी हो गई है।

पिछले पांच सालों में इस सेक्टर ने 14% की सालाना ग्रोथ के साथ दोगुना विकास किया है। एक्सपोर्ट के मोर्चे पर भी इंडिया ने दुनिया को दिखाया है कि हम सिर्फ गाड़ियां नहीं, क्वॉलिटी कलपुर्जे भी बनाते हैं। अमेरिका और एशिया में डिमांड तेजी से बढ़ी है। अमेरिका में 8% और एशिया में 15% की ग्रोथ दर्ज की गई है। कुल मिलाकर इंडिया ने 22.9 बिलियन डॉलर की एक्सपोर्ट कमाई की, और इम्पोर्ट के मुकाबले 453 मिलियन डॉलर का ट्रेड सरप्लस हासिल किया।

इंडिया की कार निर्माता कंपनियों को भी 5.7 लाख करोड़ रुपये के पार्ट्स सप्लाई किए गए है। भारत अब पुर्जों की सप्लाई के मामले में आत्मनिर्भर बन रहा है। रिपेयर और रिप्लेसमेंट का बाजार भी 1 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुका ह। गांवों, कस्बों और ऑनलाइन ऑर्डर करने वाले वाले यूज़र्स की वजह से यह उछाल आया है।

अब इंडिया सिर्फ गाड़ियों की असेंबली करने वाला देश नहीं रहा। अब हमारा देश दुनिया की गाड़ियों के कंपोनेंट और पाटर्स पूरे स्टाइल और क्वॉलिटी के साथ बना रहा है। जो सेक्टर कभी गाड़ियों के पीछे छुपा रहता था, आज वही ग्लोबल स्टेज पर स्पॉटलाइट में है। भारत की ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री अब दुनिया के ऑटोमोटिव नक्शे पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। अब इंडिया सिर्फ “मेक इन इंडिया” नहीं कर रहा, मेकिंग फॉर द वर्ल्ड कर रहा है। बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक सप्लायर नहीं, एक भरोसेमंद पार्टनर मानने लगी हैं।