दिल्ली में पेट्रोल और CNG वाहन हो सकते हैं महंगे, सरकार बढ़ा सकती है ग्रीन सेस

नई दिल्ली: दिल्ली में आने वाले समय में पेट्रोल और CNG वाहन महंगे हो सकते हैं। दिल्ली सरकार चाहती है कि लोग पेट्रोल और CNG वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदें, ताकि शहर की आबो-हवा साफ-सुथरी हो। इसलिए सरकार अब सोच रही है कि जो ग्रीन सेस पहले सिर्फ डीज़ल कारों पर लगता था, उसे अब सभी पेट्रोल और CNG वाहनों पर भी लगाया जाए।

ड्राफ्ट इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अनुसार नए पेट्रोल और CNG वाहन खरीदने पर 1–2 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स (लेवी) लग सकता है। पहले से टैक्स वाली डीज़ल कारों पर यह 2 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। अगर यह लागू हुआ तो पारंपरिक वाहनों की ऑन-रोड कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे EV और ICE वाहनों के बीच की कीमत का अंतर कम होगा। यह नीति मार्च 2026 तक कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू हो। दिल्ली में ग्रीन सेस पहली बार अपनी EV पॉलिसी 2020 के तहत शुरू किया था, जो अगस्त 2023 में खत्म हो गया था, लेकिन इसे अब मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

दिल्ली में फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का हिस्सा लगभग 12–14% है। इस साल अब तक दिल्ली में कुल 8 लाख वाहन पंजीकृत हुए हैं, जिनमें से 1.11 लाख इलेक्ट्रिक वाहन हैं। सरकार चाहती है कि यह हिस्सा और बढ़े। इसके लिए सरकार नई EV खरीदने वालों को इंसेंटिव देगी, ताकि उन्हें EV लेना फायदेमंद लगे। पारंपरिक पेट्रोल, डीज़ल और CNG वाहनों पर अतिरिक्त लागत या टैक्स लगाकर लोग EV की तरफ आकर्षित हों। ड्राफ्ट नीति के अनुसार EV लोन पर ब्याज दर कम हो सकती है ताकि कर्ज सस्ता हो। पुराने वाहनों को स्क्रैप करके बदलने पर इंसेंटिव मिल सकता है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग के लिए वित्तीय मदद मिल सकती है। 10 साल से पुराने वाहनों पर अलग से टैक्स लगाया जा सकता है।

सरकार का अनुमान है कि पुराने वाहनों पर नया सेस लगने से सालाना करीब ₹300 करोड़ की कमाई हो सकती है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मामूली सेस बढ़ाने से EV अपनाने पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि EV की उच्च शुरुआती कीमतें अब भी सबसे बड़ी बाधा हैं। सरकार ने EV अपनाने को बढ़ावा देने की दिशा में योजना बनाई है, लेकिन असली बदलाव के लिए सिर्फ सेस बढ़ाना काफी नहीं है।