नई दिल्ली: इंडिया के ऑटो-रिटेल सेक्टर के लिए जनवरी 2026 उत्साहजनक रहा। मजबूत ग्रामीण मांग, शादी-विवाह सीजन, फसल से आई नकदी और नीतिगत समर्थन के चलते कुल ऑटो रिटेल बिक्री 27,22,558 यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 17.61 प्रतिशत ज्यादा है। दोपहिया से लेकर पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल और ट्रैक्टर तक बढ़त देखने को मिली।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में सबसे ज्यादा बिकने वाले वाहन दोपहिया रहे। करीब 18.5 लाख स्कूटर-बाइक बिके। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 21% ज्यादा है। इनमें से 56% बिक्री गांवों से आई । शहरों में भी 22% से ज्यादा ग्रोथ हुई। अब मांग सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोज़मर्रा की जरूरत के लिए भी लोग वाहन खरीद रहे हैं। आसान लोन, कम डाउन पेमेंट और बेहतर फाइनेंस स्कीम की वजह से लोगों के लिए बाइक-स्कूटर खरीदना पहले से आसान हो गया है।
Passenger Vehicle (PV) में कारों की बिक्री भी बढ़ी, लेकिन रफ्तार दोपहिया से थोड़ी कम रही। करीब 5.13 लाख कारें बिकीं और ग्रोथ 7.22% रही। अभी भी ज्यादातर कारें शहरों में बिक रही हैं (करीब 59%), लेकिन असली तेजी गांवों और छोटे शहरों से आई। ग्रामीण और नॉन-मेट्रो इलाकों में कार बिक्री 14.43% बढ़ी, जबकि बड़े शहरों में सिर्फ 2.75% की बढ़त रही। इस ग्रोथ के पीछे मुख्य कारण SUV और compact-SUV की बढ़ती पसंद, सस्ती एंट्री-लेवल कारों की वापसी, डीलरशिप पर गाड़ियों की बेहतर उपलब्धता, कंपनियों की तरफ से आकर्षक ऑफर और स्कीम्स रहे।
जनवरी 2026 में ट्रक और दूसरे कमर्शियल वाहनों की बिक्री भी अच्छी रही। 1.07 लाख यूनिट बिके और ग्रोथ 15% से ज्यादा रही। पुराने ट्रकों को बदलने की डिमांड भी आई। सड़क, हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के चलते LCV (छोटे ट्रक) और HCV (बड़े ट्रक) दोनों की मांग बढ़ी। ऑटो और ई-रिक्शा जैसे थ्री-व्हीलर की बिक्री 18.8% बढ़कर 1.27 लाख यूनिट पहुंच गई। 1.14 लाख ट्रैक्टर बिके और ग्रोथ करीब 23% रही।
Construction Equipment (CE) सेगमेंट में 21% की गिरावट आई। पिछले साल बिक्री बहुत ज्यादा थी, जिसे हाई-बेस इफेक्ट कहते हैं। मांग पूरी तरह कमजोर नहीं है, बल्कि तुलना का आधार ऊंचा था। डीलर्स बता रहे हैं कि शोरूम में पूछताछ बढ़ी है। लोग महंगे और ज्यादा फीचर वाले मॉडल्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
