नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका के ऑटोमोबाइल बाज़ार में इंडिया की मौजूदगी अब सिर्फ महसूस नहीं की जा रही, बल्कि आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगी है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म Lightstone की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली करीब आधी कारों का सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध इंडिया से रहा। इनमें इंडियन कंपनियों जैसे Mahindra और Tata Motors के वाहन तो शामिल हैं ही, साथ ही वे गाड़ियां और उनके पुर्ज़े भी शामिल हैं, जिन्हें ग्लोबल कंपनियां इंडिया से मंगाकर बेच रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक Mahindra & Mahindra ने खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका के पिकअप सेगमेंट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। Mahindra & Mahindra की यह सफलता दिखाती है कि भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं। दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में Mahindra की बढ़ती पकड़ भारत की ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, भरोसेमंद इंजीनियरिंग और किफायती वाहनों की ताकत का बड़ा संकेत मानी जा रही है।
पीटीआई की रिपोर्ट यह बताती है कि दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली जापानी ब्रांड की ज्यादातर गाड़ियां असल में इंडिया में बनी होती हैं। 2024 में जापानी कंपनियों के जितने भी लाइट व्हीकल्स बिके, उनमें से 84 प्रतिशत भारत से इंपोर्ट किए गए, जबकि जापान में बनी गाड़ियों की हिस्सेदारी सिर्फ करीब 10 प्रतिशत ही रही। इनमें मारुति सुजुकी के भारतीय कारखानों में बनने वाले वे मॉडल शामिल हैं, जिन्हें Toyota अपने ब्रांड नाम से बेचती है, जैसे Toyota Starlet, Starlet Cross, Vitz और Urban Cruiser। भले ही Haval और Chery जैसे चीनी ब्रांड्स सड़कों पर ज्यादा नजर आने लगे हों, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उनका असर जितना दिखता है, उतना असल में है नहीं। 2024 में चीनी गाड़ियों की हिस्सेदारी सिर्फ 11 प्रतिशत रही, जबकि भारत से आने वाली गाड़ियों का हिस्सा 36 प्रतिशत तक पहुंच गया।
Lightstone के आंकड़ों के मुताबिक, अगर पिकअप और हल्के कमर्शियल वाहनों को हटा दिया जाए, तो 2025 की पहली छमाही में दक्षिण अफ्रीका के पैसेंजर व्हीकल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई। साल के पहले पांच महीनों में बिकने वाली कुल पैसेंजर कारों में से 49 प्रतिशत भारत से इंपोर्ट की गई थीं।
