बेंगलुरु-दिल्ली में विमानों की मरम्मत को डीजीसीए की मंजूरी, अब विदेश नहीं भेजने पड़ेंगे प्लेन के कलपुर्जे

बेंगलुरु-दिल्ली में विमानों की मरम्मत को डीजीसीए की मंजूरी, अब विदेश नहीं भेजने पड़ेंगे प्लेन के कलपुर्जे

नई दिल्ली/बेंगलुरु: इंडिया में विमान मरम्मत और रखरखाव (एमआरओ) सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में हैवियस एयरोटेक इंडिया लिमिटेड ने बड़ा विस्तार किया है। कंपनी ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से कई अहम मंजूरी हासिल की है। जर्मनी की सैफ्रान केबिन जर्मनी के साथ रणनीतिक साझेदारी भी की है।

अब बेंगलुरु में कंपनी की नई तकनीकी सुविधाएं शुरू की गई हैं, जबकि दिल्ली स्थित यूनिट को भी नई तरह की तकनीकी सेवाएं देने की अनुमति मिली है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय एयरलाइंस को अब विमान के कई महत्वपूर्ण उपकरणों और केबिन से जुड़ी मरम्मत के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अब एयरलाइंस को कई विशेष तकनीकी सेवाएं भारत में ही मिल सकेंगी, जिससे विमान की मरम्मत जल्दी होगी, समय बचेगा और ऑपरेशन की लागत भी कम होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम भारत को विमान रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कंपनी को बेंगलुरु स्थित अपने केंद्र में गैली, एवियोनिक्स और लाइफ-सेविंग इक्विपमेंट की मरम्मत और सर्विस करने की मंजूरी मिल गई है। गैली विमान में बना छोटा किचन होता है, जहां यात्रियों के लिए खाना तैयार किया जाता है और उसे रखा जाता है। एवियोनिक्स विमान के सभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे नेविगेशन, कम्युनिकेशन और कंट्रोल सिस्टम को कहा जाता है, जिनसे विमान सुरक्षित तरीके से उड़ान भरता है। लाइफ-सेविंग इक्विपमेंट विमान में इस्तेमाल होने वाले आपातकालीन सुरक्षा उपकरण, जैसे लाइफ जैकेट, ऑक्सीजन मास्क और अन्य सुरक्षा साधन होते हैं। इन सभी उपकरणों की मरम्मत और जांच अब हैवियस एयरोटेक के बेंगलुरु केंद्र में ही की जा सकेगी। इसके साथ ही यह केंद्र दक्षिण भारत का पहला और फिलहाल एकमात्र ऐसा सर्विस स्टेशन बन गया है जिसे जर्मनी की सैफ्रान केबिन जर्मनी ने आधिकारिक तौर पर अधिकृत किया है। कंपनी के पास पहले से ही उत्तर भारत में भी इसी तरह की अधिकृत सेवाएं मौजूद हैं।

इसका फायदा यह होगा कि अब देश के उत्तर और दक्षिण दोनों हिस्सों में एयरलाइंस को एक ही कंपनी के नेटवर्क से तेजी से तकनीकी सहायता मिल सकेगी। पहले कई उपकरणों को मरम्मत के लिए दूर-दराज या विदेश भेजना पड़ता था, लेकिन अब यह काम भारत में ही हो सकेगा, जिससे समय और खर्च दोनों कम होंगे। दिल्ली स्थित कंपनी के केंद्र को भी नागर विमानन महानिदेशालय से एक अहम मंजूरी मिली है। यहां अब एनवायरमेंटल और टेम्परेचर-कंट्रोल्ड कार्गो कंटेनर की मरम्मत और मेंटेनेंस किया जा सकेगा। ये ऐसे विशेष कंटेनर होते हैं जिनमें तापमान और वातावरण को नियंत्रित रखा जाता है, ताकि दवाइयां, वैक्सीन या संवेदनशील सामान सुरक्षित तरीके से हवाई मार्ग से भेजा जा सके। यह अनुमति भारत में किसी भी एमआरओ (MRO) कंपनी को पहली बार मिली है।

इससे पहले भी हैवियस एयरोटेक देश की पहली ऐसी एमआरओ कंपनी बनी थी जिसने यूनिट लोड डिवाइस कंटेनर की मरम्मत के लिए अलग से विशेष वर्कशॉप शुरू की थी। ULD कंटेनर विमान के कार्गो हिस्से में सामान को सुरक्षित तरीके से रखने और लोड करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स को काफी सुविधा मिली थी। उत्तर भारत स्थित कंपनी की सुविधा में अब विमान के केबिन से जुड़ी कई सेवाएं भी शुरू की गई हैं। इनमें सीट कवर और अपहोल्स्ट्री की मरम्मत जैसे केबिन इंटीरियर रिपेयर शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी ने एक उन्नत फैब्रिकेशन सुविधा भी शुरू की है, जहां विमान में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण प्लास्टिक पार्ट्स की मरम्मत और निर्माण कंपनी अपने ही केंद्र में करेगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी कंपनी ने बड़ा निवेश किया है। बेंगलुरु का नया केंद्र करीब 1.5 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है, जबकि दिल्ली का केंद्र 50 हजार वर्ग फुट से ज्यादा क्षेत्र में बना है। दोनों ही सुविधाएं अपने-अपने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से करीब 10 मिनट की दूरी पर स्थित हैं, जिससे एयरलाइंस को विमान की मरम्मत और तकनीकी सेवाएं जल्दी मिल सकेंगी। कंपनी चाहती है कि भारत में ही विमान की मरम्मत और तकनीकी सेवाओं का मजबूत सिस्टम (MRO इकोसिस्टम) तैयार हो जाए, ताकि भारतीय एयरलाइंस को अपने विमान के उपकरण ठीक कराने के लिए विदेशों पर निर्भर न रहना पड़े।

अभी कई बार विमान के कुछ खास पार्ट्स या उपकरणों की मरम्मत के लिए उन्हें दूसरे देशों में भेजना पड़ता है। इससे काफी समय लगता है और खर्च भी ज्यादा होता है। अगर वही सुविधा भारत में ही मिल जाए तो मरम्मत जल्दी होगी और एयरलाइंस का पैसा भी बचेगा। कंपनी का कहना है कि जर्मनी की सैफ्रान केबिन जर्मनी जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर वह भारत में ऐसी आधुनिक सुविधाएं विकसित कर रही है, जिससे विमानों की देखभाल और मरम्मत तेज, सस्ती और ज्यादा भरोसेमंद तरीके से यहीं देश के अंदर हो सके।