2035 तक इंडिया में 2.2 करोड़ EV बिक्री का लक्ष्य, हर दूसरी गाड़ी हो सकती है इलेक्ट्रिक : रिपोर्ट

नई दिल्ली: इंडिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ सकता है। KPMG India की रिपोर्ट के अनुसार साल 2035 तक देश में EV की कुल बिक्री 2.2 करोड़ (22 मिलियन) यूनिट तक पहुंच सकती है। इतना ही नहीं, दोपहिया, तिपहिया और कार जैसे ज्यादातर वाहन सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा होने का अनुमान है। यह उछाल मजबूत मांग, बेहतर सप्लाई चेन और सरकार की सहायक नीतियों की वजह से संभव होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, पर्यावरण को लेकर जागरूकता और बैटरी तकनीक में सुधार EV की मांग को लगातार बढ़ा रहे हैं। ऑटो कंपनियां भी तेजी से नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो रहा है। इन सब कारणों से आने वाले 10 वर्षों में EV आम लोगों की पहली पसंद बन सकते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, निकल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे खनिज सामान्य गाड़ियों की तुलना में काफी ज्यादा मात्रा में लगते हैं। इन जरूरी खनिजों की रिफाइनिंग क्षमता का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा दुनिया के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में केंद्रित है। इससे भू-राजनीतिक और व्यापारिक जोखिम पैदा हो सकते हैं। अगर सप्लाई में रुकावट आई तो भारत के EV प्लान पर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस चुनौती से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर खनिज खोज और उत्पादन बढ़ा सकता है। जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में संभावित भंडार की पहचान की गई है। इसके अलावा देश में रिफाइनिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। सरकार अगर लोकल रिफाइनिंग को बढ़ावा दे, लंबी अवधि के सप्लाई समझौते करे और वैकल्पिक मटेरियल पर रिसर्च को प्रोत्साहित करे तो आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है।

KPMG के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की EV सफलता सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग पर नहीं, बल्कि कच्चे माल की मजबूत आपूर्ति पर निर्भर करेगी। अगर भारत ने समय रहते रणनीतिक निवेश और नीतिगत फैसले लिए, तो वह वैश्विक EV बाजार में मजबूत और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बन सकता है।