• iPhone से आगे निकली Apple की कहानी, अब दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर बनाएगा भारत
• चीन में मैन्युफैक्चरिंग, भारत में इंजीनियरिंग! Apple की रणनीति में बड़ा बदलाव
• ₹318 करोड़ से ₹1,400 करोड़ के पार, भारत में Apple की जबरदस्त उड़ान
• Apple के लिए सोने की खान बना भारत, ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचा कारोबार
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple (Apple) अब भारत में सिर्फ iPhone बेचने और बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी ने भारत में अपने कारोबार को नई दिशा देना शुरू कर दिया है। अब भारत Apple के लिए ग्लोबल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की भारतीय सहायक इकाई ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से ही 650 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया है। एक साल पहले इस कारोबार से उसकी कोई कमाई नहीं हुई थी।
Apple की सहायक कंपनी Apple Operations India का कुल राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,400 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह महज 318 करोड़ रुपये था। कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट कारोबार भी लगभग दोगुना होकर 520 करोड़ रुपये पहुंच गया। कारोबार बढ़ने का सीधा फायदा कंपनी के मुनाफे में दिखाई दिया। Apple Operations India का शुद्ध लाभ 28 करोड़ रुपये से बढ़कर 103 करोड़ रुपये पहुंच गया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत में कंपनी का लगभग 97 प्रतिशत काम Apple के अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़ा है। यानी भारत में तैयार सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं का इस्तेमाल दुनिया भर में कंपनी के संचालन के लिए किया जा रहा है।
सॉफ्टवेयर के साथ Apple के भारतीय कारोबार ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म टॉफलर के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में Apple India का राजस्व 32 प्रतिशत बढ़कर 1,04,607 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में यह 79,060 करोड़ रुपये था। कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी 66 प्रतिशत बढ़कर 5,311 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी का कुल खर्च 96,224 करोड़ रुपये रहा।
मेमोरी और रैम की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत में Apple के स्मार्टफोन की बिक्री संख्या में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, प्रतिद्वंद्वी सैमसंग के भारतीय मोबाइल फोन कारोबार के राजस्व में मामूली गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी विश्लेषकों के मुताबिक Apple अब भारत को केवल स्मार्टफोन बाजार या मैन्युफैक्चरिंग केंद्र नहीं, बल्कि अपनी वैश्विक तकनीकी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहा है। इससे देश में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से जुड़े नए अवसर बढ़ सकते हैं।
