नई दिल्ली: अब इंडियन कारें सिर्फ बिक्री में ही नहीं बल्कि सुरक्षा में भी कोरिया में बनी कारों से आगे निकल गई हैं। लोग महिंद्रा और टाटा की कारें खरीद रहे हैं। इन कारों ने बच्चों और वयस्कों की सुरक्षा दोनों में टॉप रेटिंग हासिल कर रही हैं। भारतीय ब्रैंड अब सिर्फ ज्यादा बिकने वाली कारें नहीं, बल्कि भरोसेमंद और सुरक्षित कारें भी बना रहे हैं।
Bharat NCAP (New Car Assessment Program) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार टाटा और महिंद्रा की कई कारें बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सबसे सुरक्षित साबित हुई हैं, जबकि Hyundai और Kia की तुलना में उनके पास पांच-सितारा मॉडल ज्यादा हैं। टाटा के 10 मॉडल्स और महिंद्रा के 5 मॉडल्स ने टॉप सुरक्षा रेटिंग पाई है। Kia का सिर्फ Syros मॉडल ही पांच-सितारा है, और Hyundai की वर्तमान कारें इस रेटिंग को पाने में सफल नहीं हुईं। महिंद्रा की Thar Roxx, XUV 3XO जैसी पारंपरिक इंजन वाली कारें और XUV400, BE6, XEV9e जैसी इलेक्ट्रिक कारें भी सुरक्षित साबित हुई हैं। टाटा के Altroz, Punch, Nexon, Curvv, Harrier, Safari और इनके इलेक्ट्रिक वर्ज़न भी फाइव स्टार सिक्युरिटी रेटिंग हासिल की हैं।
Hyundai और Kia ने अपनी ज्यादातर कारों में 6 एयरबैग और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल स्टैंडर्ड रखा है। Hyundai तो इंडिया में पहली कंपनी थी जिसने सभी मॉडलों में छह एयरबैग देना शुरू किया। Maruti Suzuki के चार मॉडल—Dzire, Victoris, Invicto और e Vitara—पांच-सितारा सुरक्षा रेटिंग प्राप्त कर चुके हैं। Toyota की Innova Hycross और Skoda की Kylaq के पास एक-एक मॉडल ही शीर्ष रेटिंग रखते हैं।
अब सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि बिक्री में भी भारतीय कारें कोरिया की कारों से आगे हैं। महिंद्रा और टाटा ने मिलकर लगभग 28% बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जबकि Hyundai और Kia की हिस्सेदारी घटकर लगभग 19% रह गई। अप्रैल–दिसंबर FY26 में महिंद्रा ने 4,76,476 और टाटा ने 4,46,017 कारें बेचीं, जबकि Hyundai और Kia ने क्रमशः 4,18,328 और 2,04,710 कारें बेचीं। विशेषज्ञों का कहना है कि SUV की बढ़ती मांग और सुरक्षा पर जोर देने के कारण लोग अब भारतीय ब्रांडों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भारतीय कारें अब सुरक्षित, भरोसेमंद और खरीदारों की पहली पसंद बन गई हैं। यह बदलाव बाजार में बिक्री और सुरक्षा दोनों में साफ दिखाई दे रहा है।
