मानेसर से कश्मीर तक ट्रेन से भेजीं 5.85 लाख गाड़ियां, Maruti Suzuki का रेल मॉडल हिट

नई दिल्ली: Maruti Suzuki India Limited ने पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने 2025 में रेलवे से 5.85 लाख से ज्यादा वाहनों की डिलीवरी की, जो 2024 की तुलना में 18 प्रतिशत ज्यादा है। यह अब तक का Maruti Suzuki का सबसे बड़ा रेल डिस्पैच है। इस पहल से न सिर्फ करीब 87,904 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन बचा, बल्कि 687 लाख लीटर से ज्यादा ईंधन की भी बचत हुई।

पिछले दस वर्षों में Maruti Suzuki ने गाड़ियों को भेजने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। पहले ज्यादातर वाहन सड़क के जरिए भेजे जाते थे, लेकिन अब कंपनी तेजी से रेल परिवहन की ओर बढ़ी है। 2016 में जहां सिर्फ हर 100 में से करीब 5 गाड़ियां रेल से जाती थीं, वहीं 2025 में हर 100 में से लगभग 26 गाड़ियां रेल के जरिए भेजी जा रही हैं। रेल से भेजी जाने वाली गाड़ियों की संख्या करीब 77 हजार से बढ़कर 5.85 लाख से ज्यादा हो गई है।

Maruti Suzuki India Limited के MD & CEO Mr. Hisashi Takeuchi ने कहा कि 2025 में Manesar फैक्ट्री में ही रेल लाइन जुड़ गई है। इससे गाड़ियां सीधे प्लांट से ट्रेन में लोड होकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक भेजी जा सकती हैं। वहीं चेनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे railway arch bridge के जरिए Kashmir valley तक रेल से वाहनों की सप्लाई करने वाली Maruti Suzuki पहली ऑटोमोबाइल कंपनी बन गई है। कंपनी का लक्ष्य 2030-31 तक रेल के जरिए वाहन डिस्पैच को 35 प्रतिशत तक बढ़ाना है, ताकि 2070 तक भारत के net-zero लक्ष्य में योगदान दिया जा सके।

Maruti Suzuki ने 2014-15 से अब तक कंपनी ने 22 अलग-अलग डेस्टिनेशन से देश के 600 से ज्यादा शहरों तक करीब 28 लाख से अधिक वाहनों को रेल के जरिए पहुंचाया है। कंपनी के पास फिलहाल 45 से ज्यादा flexi deck rakes हैं। ये खास तरह की ट्रेनें होती हैं, जिनमें एक बार में करीब 260 गाड़ियां ले जाई जा सकती हैं। 2025 में Gujarat और Manesar के in-plant railway siding से भेजे गए वाहन कुल रेल डिस्पैच का 53 प्रतिशत रहे। कंपनी अब फैक्ट्री से सीधे रेल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है, जिससे समय, खर्च और कार्बन उत्सर्जन—तीनों में कमी आ रही है।