EV सेक्टर में रिलायंस की बैटरी स्वैपिंग क्रांति, अब मिनटों में बदलेगी बैटरी

EV सेक्टर में रिलायंस की बैटरी स्वैपिंग क्रांति, अब मिनटों में बदलेगी बैटरी

नई दिल्ली : इंडिया में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दौड़ अब एक नए मोड़ पर पहुंचने जा रही है। देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल Reliance Industries की स्वच्छ ऊर्जा इकाई Reliance New Energy इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए बैटरी-स्वैपिंग सेवा शुरू करने की तैयारी में है। यह पहल खास तौर पर लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी सेक्टर को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

कंपनी ने चार बैटरी वेरिएंट और तीन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर प्लेटफॉर्म के लिए ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) से सर्टिफिकेट हासिल कर लिया है। अब अगला चरण इन बैटरियों और वाहनों की टेस्टिंग का है, जिसकी शुरुआत रिलायंस अपने ही बेड़े (फ्लीट) से करेगी। कंपनी पहले अपने आंतरिक संचालन में बैटरी-स्वैपिंग मॉडल को टेस्ट करेग। इसके बाद चुनिंदा शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इसका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक विस्तार देखने को मिल सकता है। इस पूरी योजना का केंद्र रिलायंस की ओर से विकसित रिमूवेबल लिथियम-आयन बैटरी पैक है। यह बैटरी केवल इलेक्ट्रिक स्कूटर ही नहीं, बल्कि ई-रिक्शा, थ्री-व्हीलर और हल्के कमर्शियल वाहनों को भी ऊर्जा देने में सक्षम होगी। कंपनी ने इस तकनीक को पहली बार 2023 के Renewable Energy India Expo में प्रदर्शित किया था।

बैटरी-स्वैपिंग मॉडल का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है। जहां सामान्य चार्जिंग में घंटों लग सकते हैं, वहीं बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पर कुछ ही मिनटों में खाली बैटरी निकालकर पूरी तरह चार्ज बैटरी लगाई जा सकती है। इससे डिलीवरी एजेंसियों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के वाहनों का डाउनटाइम लगभग समाप्त हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल उन फ्लीट ऑपरेटरों के लिए सबसे अधिक फायदेमंद साबित होगा जो सीमित भौगोलिक क्षेत्र में लगातार वाहन संचालन करते हैं। ई-कॉमर्स कंपनियां, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और कुरियर सेवाएं इसके प्रमुख ग्राहक बन सकती हैं।

कंपनी सेल निर्माण, बैटरी निर्माण, चार्जिंग नेटवर्क और ऊर्जा सेवाओं को जोड़ते हुए एक संपूर्ण इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग और सरकार के हरित ऊर्जा लक्ष्यों के बीच रिलायंस का यह कदम EV उद्योग में नई प्रतिस्पर्धा और नए अवसरों के द्वार खोल सकता है। यदि योजना सफल रही तो डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों को नई रफ्तार मिल सकती है।