नई दिल्ली: Tata Motors ने आगामी केंद्रीय बजट से पहले सरकार से एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए खास प्रोत्साहन देने की मांग की है। सरकार की नीतियों से पेट्रोल-डीज़ल कारें सस्ती हो गई हैं, लेकिन उसी वजह से सस्ती इलेक्ट्रिक कारें मुकाबले में पिछड़ने लगी हैं।
आज आम ग्राहक जब नई गाड़ी खरीदने जाता है, तो उसे पेट्रोल कार कम दाम में मिल रही है, जबकि एंट्री-लेवल EV अभी भी महंगी पड़ रही है। ऐसे में लोग EV लेने का मन होते हुए भी बजट के कारण पेट्रोल गाड़ी चुन लेते हैं। Tata Motors चाहती है कि बजट में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों को कुछ अतिरिक्त छूट या इंसेंटिव मिले, ताकि उनकी कीमत पेट्रोल कारों के करीब आ सके।
Tata Motors Passenger Vehicles के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने बताया कि सरकार के फैसलों से ऑटो इंडस्ट्री को राहत तो मिली है, लेकिन उसका फायदा ज्यादातर पेट्रोल-डीज़ल कारों को हुआ है। GST 2.0, रेपो रेट में कटौती और टैक्स सिस्टम में बदलाव से पेट्रोल गाड़ियां सस्ती हो गईं, जबकि एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों की कीमतों में वैसी राहत नहीं आई। सरकार ने पिछले साल ऑटो सेक्टर को संभालने के लिए सही और मजबूत कदम उठाए हैं, लेकिन अब बजट में खास तौर पर सस्ती इलेक्ट्रिक कारों के लिए कुछ राहत देने की जरूरत है। इसके अलावा Tata Motors ने फ्लीट सेगमेंट में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक कारों के लिए भी सपोर्ट मांगा है।
उन्होंने बताया कि भले ही फ्लीट EVs की हिस्सेदारी कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में सिर्फ 7% है, लेकिन ये गाड़ियां 33–35% पैसेंजर किलोमीटर का योगदान देती हैं। एक टैक्सी या फ्लीट कार आम गाड़ी से पांच गुना ज्यादा चलती है, इसलिए अगर इसे इलेक्ट्रिक बनाया जाए तो प्रदूषण घटाने और तेल आयात कम करने में इसका असर कई गुना ज्यादा होता है। Tata Motors का मानना है कि बिना सरकारी मदद के एंट्री-लेवल EV का सपना आम आदमी तक नहीं पहुंचेगा, और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
