नई दिल्ली: देश में छोटे कमर्शियल वाहनों (SCV) का बाजार, जो पिछले करीब दो साल से सुस्त चल रहा था, अब फिर से तेजी पकड़ रहा है। पिक-अप गाड़ियों की बिक्री में 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ज्यादा पेलोड, बेहतर कमाई और कम टैक्स-ब्याज दरों के चलते पिक-अप की मांग बढ़ी, जिससे पूरा SCV सेगमेंट दोबारा ग्रोथ की पटरी पर लौट आया।पिक-अप वाहनों का इस्तेमाल गांवों, कस्बों और शहरों में दुकानों, गोदामों और घरों तक सामान पहुंचाने में होता है। SCV सेगमेंट में दो तरह के वाहन आते हैं, पिक-अप वाहन, जिनका वजन (GVW) 2 से 3.5 टन होता है। मिनी-ट्रक, जिनका वजन 2 टन तक होता है। ये दोनों मिलकर देश के लाइट कमर्शियल व्हीकल (LCV) बाजार का करीब 85% हिस्सा बनाते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनों में SCV की बिक्री 7% बढ़कर करीब 3.70 लाख यूनिट पहुंच गई। पिछले साल इसी अवधि में यह बिक्री करीब 3.45 लाख यूनिट थी। ऑटो इंडस्ट्री की संस्था SIAM के अनुसार मिनी-ट्रक के मुकाबले पिक-अप वाहन सबसे ज्यादा बिके हैं। इस सेगमेंट में 10 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी के साथ बिक्री 2.52 लाख यूनिट तक पहुंच गई। विशेषज्ञ बताते हैं कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पॉजिटिव फैक्टर्स के कारण मांग बढ़ी। सरकार ने कमर्शियल वाहनों पर GST को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया, जिससे गाड़ियां सस्ती पड़ीं। वहीं ब्याज दरें कम होने से लोन लेना आसान हुआ।
पिक-अप सेगमेंट में Mahindra की 60% हिस्सेदारी है। Ashok Leyland (20%) दूसरे नंबर पर और Tata Motors (18%) तीसरे स्थान पर है। लोग अब छोटे ट्रक से ज्यादा ताकतवर पिक-अप की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, और इसी बदलाव ने पूरे SCV बाजार को नई जान फूंक दी है।
मिनी-ट्रक सेगमेंट में अभी भी Tata Motors का सबसे ज्यादा दबदबा बना हुआ है। इस समय हर 10 में से करीब 5 मिनी-ट्रक (52%) Tata Motors के बिकते हैं। मारुति सुजुकी की 24% हिस्सेदारी है। महिंद्रा करीब 23% हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके साथ ही अब सिर्फ डीजल या पेट्रोल नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक छोटे ट्रक भी बाजार में आ रहे हैं। पूरा SCV बाजार अब ज्यादा ताकतवर पिक-अप और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ रहा है।
