नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक बसों की खरीद से जुड़ी केंद्र सरकार की बड़ी योजना PM EDRIVE Scheme के दूसरे चरण में देरी हो गई है। दरअसल दिल्ली के लिए मिलने वाली सब्सिडी को लेकर साफ जानकारी नहीं होने के कारण कई कंपनियों ने सवाल उठाए, जिसके बाद टेंडर की आखिरी तारीख 10 मार्च से बढ़ाकर 9 अप्रैल कर दी गई है। यह टेंडर 6,230 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए निकाला गया है। टेंडर की समय सीमा 10 मार्च 2026 से बढ़ाकर 9 अप्रैल 2026 कर दी गई है। उच्च बयाना राशि, कड़ी निकास शर्तें और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह देरी हुई है। यह योजना 10,900 करोड़ रुपये के खर्च के साथ मार्च 2028 तक लागू रहेगी।
कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) ने 6,230 ई-बसों के लिए टेंडर प्रक्रिया को 9 अप्रैल तक बढ़ा दिया है, जो 10 मार्च को बंद होने वाली थी। योजना के तहत दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के लिए इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जानी हैं। इसमें सबसे ज्यादा करीब 3,330 बसें दिल्ली के लिए प्रस्तावित हैं।
लेकिन बोली लगाने वाली कंपनियों को यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली सरकार इन बसों को PM E-DRIVE योजना की सब्सिडी के तहत खरीदेगी या किसी दूसरे भुगतान मॉडल के तहत। इसी कारण कंपनियों को यह तय करने में परेशानी हो रही है कि उन्हें अपनी कीमत सब्सिडी के साथ कोट करनी चाहिए या बिना सब्सिडी के। इसी स्पष्टीकरण के इंतजार में टेंडर की समयसीमा बढ़ा दी गई है। सरकार की PM EDRIVE Scheme के तहत कुल 14,028 इलेक्ट्रिक बसें अलग-अलग शहरों में तैनात करने की योजना है, जिसके लिए करीब 4,391 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह बसें दो चरणों में सात बड़े शहरों बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत — में चलाई जानी हैं।
पहले चरण में 10,900 इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में 6,230 बसों की खरीद के लिए प्रक्रिया चल रही है। दूसरे चरण के टेंडर में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। पहले जहां केवल 9 मीटर और 12 मीटर लंबी बसें शामिल थीं, वहीं अब 7 मीटर लंबी छोटी बसों को भी शामिल किया गया है कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए EMD (अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट) भी कम कर दी गई है — जो पहले लगभग 3 लाख रुपये प्रति बस थी, उसे कुछ मामलों में घटाकर करीब 1.6 लाख रुपये कर दिया गया है।
