ई-बस और ई-ट्रक खरीदना होगा आसान : सरकार ला सकती है ब्याज सब्सिडी योजना

नई दिल्ली: बढ़ती तेल कीमतों और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार अब इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को बड़ा प्रोत्साहन देने की तैयारी में है। केंद्र सरकार निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत 50 हजार ई-बसों और 10 हजार ई-ट्रकों को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश में इलेक्ट्रिक कमर्शियल मोबिलिटी को नई रफ्तार मिल सकती है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत 3-5% तक ब्याज सब्सिडी देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि निजी ऑपरेटरों के लिए ई-बस और ई-ट्रक खरीदना आसान हो सके। प्रस्ताव के मुताबिक सरकार ई-बसों के लिए करीब 5,760 करोड़ रुपये और ई-ट्रकों के लिए लगभग 1,200 करोड़ रुपये का प्रावधान कर सकती है। हाल ही में Ministry of Heavy Industries ने इस प्रस्ताव पर बैंकों, फ्लीट ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा भी की है।

इस कदम को पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती तेल कीमतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक जहां एक डीजल बस करीब 60 लाख रुपये में आती है, वहीं समान क्षमता वाली ई-बस की कीमत लगभग 1.2 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसी तरह 55 टन डीजल ट्रक की कीमत करीब 58 लाख रुपये होती है, जबकि उसके इलेक्ट्रिक संस्करण की कीमत करीब 1.22 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

यही वजह है कि सरकार अब लागत का बोझ कम करने के लिए दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रही है, आंशिक क्रेडिट गारंटी और 3-5% ब्याज सब्सिडी योजना। अनुमान है कि सरकारी मदद से 70 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये तक का निजी निवेश आकर्षित किया जा सकता है। सरकार टोल टैक्स माफी और वाहन पंजीकरण शुल्क में छूट जैसे अतिरिक्त प्रोत्साहनों पर भी विचार कर रही है। उद्योग की ओर से मांग की गई है कि ई-बस और ई-ट्रकों को इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्जा, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और डीजल वाहनों जैसी उच्च Loan-to-Value (LTV) सुविधा भी मिले। अगर यह योजना लागू होती है, तो भारत के इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन बाजार को बड़ा बूस्ट मिल सकता है और ई-बस तथा ई-ट्रक अपनाने की रफ्तार तेज हो सकती है।