EV और हाइड्रोजन पर Ashok Leyland का बड़ा दांव, ₹1000 करोड़ करेगी निवेश

नई दिल्ली : इंडिया की दिग्गज कमर्शियल व्हीकल कंपनी Ashok Leyland अब इलेक्ट्रिक और क्लीन फ्यूल टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी ने FY27 के दौरान 800 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये तक के कैपेक्स (पूंजी निवेश) की योजना बनाई है। यह निवेश नए प्रोडक्ट्स, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और बैटरी व वैकल्पिक ईंधन टेक्नोलॉजी पर किया जाएगा। कंपनी तेजी से अपना इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम तैयार कर रही है। इसी कड़ी में Ashok Leyland अपनी नई बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शुरू करने जा रही है, जिसे चीनी बैटरी निर्माता CALB के साथ साझेदारी में तैयार किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इस प्लांट का प्रोडक्शन अगले वित्त वर्ष की पहली या दूसरी तिमाही में शुरू हो सकता है।


कंपनी के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रिक बसों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। केंद्र और राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं, जिसका सीधा फायदा कमर्शियल EV कंपनियों को मिल रहा है। Ashok Leyland ने कहा कि फिलहाल उसकी EV सप्लाई चेन पर किसी तरह का बड़ा असर नहीं पड़ा है और कंपनी मौजूदा मांग को आराम से पूरा कर रही है। कंपनी की इलेक्ट्रिक बस यूनिट Switch Mobility हाल ही में मुनाफे में आई है। हालांकि यूरोप में आर्थिक चुनौतियों के चलते कंपनी फिलहाल स्पेन प्लांट की योजना पर आगे नहीं बढ़ रही है।

Ashok Leyland अब सिर्फ इंडिया ही नहीं बल्कि विदेशी बाजारों में भी तेजी से विस्तार करना चाहती है। FY26 में कंपनी के एक्सपोर्ट में 19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। GCC देशों, अफ्रीका और SAARC मार्केट से मजबूत मांग देखने को मिली। कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में एक्सपोर्ट को 25 हजार यूनिट तक पहुंचाने का है। इसके अलावा अब ASEAN देशों को भी कंपनी अपना अगला बड़ा मार्केट बनाने की तैयारी कर रही है।

Ashok Leyland इलेक्ट्रिक के साथ-साथ हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी पर भी तेजी से काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि लंबी दूरी वाले भारी ट्रकों और कमर्शियल वाहनों के लिए हाइड्रोजन भविष्य में बड़ा विकल्प बन सकता है। हालांकि कंपनी ने माना कि भारत में हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में अभी काफी समय लगेगा क्योंकि इसकी लागत बहुत ज्यादा है। इसके बावजूद कंपनी NTPC जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर हाइड्रोजन बस और ट्रक पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। दिल्ली और लेह जैसे इलाकों में इन वाहनों की टेस्टिंग भी की जा रही है।