• अब हर टैलेंट को मिलेगा मौका, ऑटो इंडस्ट्री में आएगी नई क्रांति
अगली ऑटो क्रांति फैक्ट्री में नहीं, डिज़ाइन स्टूडियो में होगी
फेरारी की नई इलेक्ट्रिक कार Luce के लॉन्च के बाद दुनिया भर में इसकी डिज़ाइन को लेकर बहस छिड़ गई। किसी ने इसे शानदार बताया तो किसी ने फेरारी की पहचान खत्म होने की बात कही। लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या कार की डिज़ाइन सिर्फ वही लोग बना सकते हैं जिन्होंने ऑटोमोबाइल डिज़ाइनिंग की पढ़ाई की है?
ऑटो इंडस्ट्री के जानकार अविक चट्टोपाध्याय का मानना है कि अगर भारत को आने वाले वर्षों में दुनिया का बड़ा मोबिलिटी और डिज़ाइन हब बनना है, तो ऑटोमोबाइल डिज़ाइन को कुछ चुनिंदा संस्थानों और लोगों तक सीमित रखने की सोच बदलनी होगी। डिज़ाइन किसी डिग्री या परंपरा की कैद में नहीं रह सकती।
ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि आज भी कई लोग मानते हैं कि कार डिज़ाइन करना केवल प्रशिक्षित ऑटोमोबाइल डिज़ाइनर का काम है। जबकि इतिहास बताता है कि सबसे बड़े कलाकार, वैज्ञानिक और आविष्कारक कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाते रहे हैं। लियोनार्डो दा विंची ने पेंटिंग से लेकर मशीनों तक की कल्पना की, वहीं रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कविता, संगीत, नाटक और वास्तुकला जैसे कई क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी। कुछ लोग देश में बढ़ रहे ऑटोमोबाइल डिज़ाइन स्कूलों का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि नए संस्थानों में गुणवत्ता की कमी हो सकती है। हालांकि गुणवत्ता का फैसला बाज़ार और छात्रों की सफलता करेगी, न कि कुछ लोगों की राय। जैसे इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रतिस्पर्धा के बाद अच्छे संस्थान आगे आए और कमजोर पीछे रह गए, वैसे ही डिज़ाइन शिक्षा में भी यही होना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में जितने अधिक डिज़ाइन संस्थान खुलेंगे, उतनी ही ज्यादा प्रतिभाएं सामने आएंगी। इससे केवल कार कंपनियों को ही नहीं, बल्कि ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रेलवे, विमानन, जल परिवहन और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को भी बेहतर डिज़ाइनर मिलेंगे।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के दिग्गज जानकारों ने कहा कि भारत आज दुनिया का बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है। अब अगला लक्ष्य दुनिया का डिज़ाइन पावरहाउस बनना होना चाहिए। इसके लिए सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों को मिलकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां हर प्रतिभाशाली छात्र को मौका मिले, चाहे वह किसी भी शहर, कॉलेज या आर्थिक पृष्ठभूमि से आता हो। क्रिएटिविटी पर किसी एक वर्ग या संस्था का अधिकार नहीं हो सकता। नए विचार, नई सोच और खुली प्रतिस्पर्धा ही भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। जब डिज़ाइन लोकतांत्रिक होगा, तभी भारत भविष्य की ऐसी गाड़ियां बना सकेगा, जो दुनिया के लिए मिसाल बनें।
