नई दिल्ली। इंडिया के तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक वाहन बाजार पर भरोसा जताते हुए डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स (डीआईसीवी) ने तमिलनाडु में 4,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की है। इस निवेश से भारतबेंज़ ट्रकों और बसों के उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास, नई तकनीकों और विनिर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी, वहीं करीब 400 नए रोजगार भी सृजित होने की उम्मीद है।
14,500 करोड़ रुपये के पार पहुंचा कुल निवेश
डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स ने यह निवेश तमिलनाडु सरकार के साथ एक गैर-बाध्यकारी सहमति ज्ञापन (एमओयू) के तहत घोषित किया है। इस नए निवेश के बाद कंपनी का भारत में कुल निवेश 14,500 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह फैसला भारत और भारतबेंज़ ब्रांड के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी के मुताबिक, यह निवेश केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग उत्पाद विकास, विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, अत्याधुनिक अवसंरचना और भविष्य की तकनीकों को विकसित करने में किया जाएगा, ताकि भारतबेंज़ आने वाले वर्षों की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।
400 लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना के तहत प्रस्तावित अवधि में करीब 400 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। कंपनी का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं तथा सहयोगी उद्योगों को भी फायदा मिलेगा। साल 2012 में भारतबेंज़ ब्रांड की शुरुआत के बाद से अब तक भारत की सड़कों पर 2.20 लाख से अधिक ट्रक और बसें उतर चुकी हैं। ये वाहन माल परिवहन, निर्माण, खनन, लॉजिस्टिक्स और यात्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर बूम का मिलेगा फायदा
कंपनी का मानना है कि भारत में सड़क, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, बंदरगाह, खनन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में तेजी से हो रहे निवेश के कारण आने वाले वर्षों में ट्रकों और बसों की मांग और बढ़ेगी। इसी संभावित मांग को देखते हुए कंपनी अभी से अपनी उत्पादन क्षमता और तकनीकी ढांचे को मजबूत कर रही है। भारतबेंज़ के ट्रकों को खासतौर पर भारतीय परिस्थितियों और लंबी दूरी के परिवहन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कंपनी के ट्रक लंबी दूरी के माल परिवहन, क्षेत्रीय डिलीवरी, खनन, निर्माण कार्य, ट्रैक्टर-ट्रेलर और विशेष परिवहन जरूरतों के लिए तैयार किए जाते हैं। वहीं भारतबेंज़ की बसें स्कूल, कर्मचारियों के परिवहन और अंतर-शहरी यात्रा के लिए बनाई जाती हैं, जिनमें सुरक्षा, आराम और कम परिचालन लागत पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
चेन्नई प्लांट बना कंपनी की ताकत
चेन्नई के पास ओरगडम में स्थित डीआईसीवी का 400 एकड़ में फैला एकीकृत विनिर्माण और अनुसंधान केंद्र कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है। यहां 4,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और कंपनी को 400 से ज्यादा स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं का सहयोग मिलता है। कंपनी के अनुसार, भारतबेंज़ के उत्पादों का करीब 92 प्रतिशत मूल्य भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर तैयार किया जाता है।
420 से ज्यादा डीलर और सर्विस सेंटर
देशभर में भारतबेंज़ का नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनी के पास 420 से अधिक डीलर और सर्विस टचपॉइंट्स हैं, जो प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्रों और क्षेत्रीय बाजारों तक फैले हुए हैं। इसके अलावा हाल ही में पुणे में शुरू किया गया नया पार्ट्स लॉजिस्टिक्स सेंटर ग्राहकों को स्पेयर पार्ट्स जल्दी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इंडिया अब सिर्फ भारतबेंज़ का बाजार नहीं, बल्कि डेमलर ट्रक के वैश्विक नेटवर्क का अहम उत्पादन केंद्र भी बन चुका है। डीआईसीवी अब तक 70 से अधिक देशों में 75,000 से ज्यादा ट्रक और बसें निर्यात कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी 33 करोड़ से अधिक ऑटो पार्ट्स भी दुनिया के विभिन्न बाजारों में भेज चुकी है और चेन्नई से जर्मनी स्थित डेमलर ट्रक के संयंत्रों को ट्रांसमिशन की आपूर्ति भी करती है।
कंपनी ने क्या कहा?
डीआईसीवी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉर्स्टन श्मिट ने कहा कि भारतबेंज़ को शुरू से ही भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, खनन और यात्री परिवहन के तेजी से विस्तार को देखते हुए बेहतर सुरक्षा, विश्वसनीयता और कम परिचालन लागत वाले ट्रकों एवं बसों की मांग लगातार बढ़ रही है। नया निवेश इन्हीं जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है।
