फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति की तैयारी, लेकिन कई रोड़े हैं इस राह में

फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति की तैयारी, लेकिन कई रोड़े हैं इस राह में

नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर आयातित तेल पर निर्भरता घटाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) के रूप में नई रफ्तार पकड़ रही है। देश की प्रमुख ऑटो कंपनियां एक के बाद एक फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च कर रही हैं, लेकिन उद्योग का कहना है कि केवल वाहन बाजार में उतार देने से क्रांति नहीं आएगी। उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए सस्ता ईंधन, सरकारी प्रोत्साहन, व्यापक फ्यूल नेटवर्क और अनुकूल नियम जरूरी होंगे। उद्योग ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित CAFE-III मानकों में राहत नहीं मिली तो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक में निवेश का पूरा गणित बिगड़ सकता है।

इंडिया में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लेकर उत्साह चरम पर है। सरकार लगातार पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में वाहन निर्माता भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। हाल ही में मारुति सुजुकी ने ऐसी वैगनआर पेश की है जो E20 से लेकर E100 तक किसी भी एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकती है। कंपनी ने इसके शुरुआती 13 ग्राहकों को वाहन भी सौंप दिए हैं। दोपहिया क्षेत्र में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर प्लस और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण बाजार में उतार दिए हैं।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं जो E20, E85 और यहां तक कि शुद्ध एथेनॉल यानी E100 पर भी चल सकते हैं। हालांकि फिलहाल देशभर में केवल E20 ईंधन ही व्यापक रूप से उपलब्ध है, जबकि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के विस्तार पर काम चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर माइलेज में कुछ कमी आती है, इसलिए यदि ईंधन की कीमतों में पर्याप्त कमी नहीं हुई तो ग्राहक फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अपनाने से हिचक सकते हैं। उद्योग ने सरकार से ऐसे प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है जो वाहन खरीद लागत और उपयोग लागत दोनों को कम कर सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति की सफलता तीन स्तंभों पर निर्भर करेगी—उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की उपलब्धता, पर्याप्त रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिस्पर्धी ईंधन मूल्य। साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि E20 पेट्रोल की उपलब्धता जारी रहे, क्योंकि अचानक उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पुराने वाहनों के इंजनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत ने फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है, लेकिन उद्योग का साफ संदेश है कि केवल नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि मजबूत प्रोत्साहन, व्यावहारिक नियम और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही इस हरित ईंधन क्रांति को सड़क पर उतार पाएंगे।