E100 को सरकार की हरी झंडी! 100% एथेनॉल से दौड़ेंगी कारें

E100 को सरकार की हरी झंडी! 100% एथेनॉल से दौड़ेंगी कारें

• पेट्रोल का विकल्प तैयार! E100 कारों के लिए बदले मोटर वाहन नियम

• भारत में फ्लेक्स-फ्यूल कारों की तैयारी तेज! E100 और E85 के नियमों में बदलाव

• पुरानी कार वालों को राहत! E100 नियमों में बदलाव के बाद भी कोई मॉडिफिकेशन जरूरी नहीं

पेट्रोल की बढ़ती जरूरत और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को नियामकीय मंजूरी दे दी है। इससे ऐसे वाहनों के लिए रास्ता साफ होगा, जो 100% तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए खास तौर पर डिजाइन और प्रमाणित किए गए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ वाहन निर्माता आने वाले महीनों में E100 मॉडल पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।

 E100 या E85 ईंधन का उपयोग केवल उन गाड़ियों में किया जा सकेगा, जिन्हें विशेष रूप से इसके लिए डिज़ाइन और प्रमाणित (Certified) किया गया है। सामान्य पेट्रोल या E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) ईंधन के लिए बनाई गई मौजूदा कारों में E100 या E85 का उपयोग नहीं किया जा सकता है। पुरानी गाड़ी के मालिकों को इंजन बदलने या मॉडिफाई कराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने इस बदलाव के साथ हल्की पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों की वज़न सीमा को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दिया है

सरकार ने उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों में संशोधन करते हुए E100 को E85 के साथ शामिल किया है। E85 ईंधन में करीब 85% एथेनॉल होता है, जबकि E100 मुख्य रूप से एथेनॉल पर आधारित ईंधन है। हालांकि, इन ईंधनों का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें इनके लिए विशेष रूप से तैयार और प्रमाणित किया गया है।

इस तकनीक को फ्लेक्स-फ्यूल कहा जाता है। इसमें वाहन एक ही फ्यूल टैंक के जरिये पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चल सकता है। वाहन कितने अनुपात तक एथेनॉल इस्तेमाल कर सकता है, यह उसके डिजाइन और प्रमाणन पर निर्भर करता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव के बाद मौजूदा कार मालिकों को अपनी गाड़ियों में कोई बदलाव कराने या E85 अथवा E100 ईंधन इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। E20 या सामान्य पेट्रोल पर चलने वाली कारों में E85 या E100 ईंधन नहीं डालना चाहिए, जब तक वाहन निर्माता ने उस मॉडल को इसके लिए प्रमाणित न किया हो।

एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोल में जीवाश्म ईंधन की जरूरत कम हो सकती है। अधिक एथेनॉल मिश्रण से कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का इस्तेमाल पहले से होता है। भारत में E100 के लिए नियमों में बदलाव से वाहन निर्माताओं को ऐसे मॉडल विकसित करने का अवसर मिलेगा।