नई दिल्ली। इंडिया का ऑटो कंपोनेंट उद्योग अब सिर्फ चुनौतियों से निपटने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ग्लोबल बाजार में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के 66वें वार्षिक सत्र में उद्योग ने 2030 तक 200 अरब डॉलर का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रखा। ‘बियॉन्ड रेजिलिएंस’ थीम पर आयोजित सेशन में सामने आए ACMA-BCG सर्वे के मुताबिक, करीब 90% ऑटो कंपोनेंट कंपनियों का मानना है कि वे भारत में बढ़ते मोबिलिटी अवसरों का फायदा उठाने के लिए सही समय और सही स्थिति में हैं।
FY26 में भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग का कारोबार 12.7% बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपये (85.9 अरब डॉलर) पहुंच गया। पिछले पांच वर्षों में उद्योग का बाजार आकार दोगुना हुआ है। इस दौरान OEM को कंपोनेंट सप्लाई में 16.3% की वृद्धि हुई, जबकि कंपोनेंट निर्यात बढ़कर 24 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे भारत की पहचान वैश्विक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग हब के तौर पर मजबूत हुई है।
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार की PLI जैसी योजनाएं निवेश, घरेलू वैल्यू एडिशन, एडवांस टेक्नोलॉजी और क्लीन मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही हैं।‘बियॉन्ड रेजिलिएंस’ भारत के ऑटो उद्योग के लिए आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। ACMA के मुताबिक उद्योग की अगली ग्रोथ इंडस्ट्री 5.0 से आएगी। इसमें AI, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, IoT और मानव विशेषज्ञता को एक साथ इस्तेमाल कर ज्यादा स्मार्ट, लचीले और टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम तैयार किए जाएंगे। कंपनियों के लिए AI, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग में कर्मचारियों को अपस्किल करना भी जरूरी होगा।
सत्र में SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्र, CII अध्यक्ष एवं Tata Chemicals के एमडी आर. मुकुंदन और Maruti Suzuki India के एमडी एवं CEO हिसाशी टेकुची समेत ऑटो उद्योग के कई दिग्गज शामिल हुए। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ग्लोबल उथल-पुथल के बीच भी तेज आर्थिक रफ्तार बनाए हुए है और देश के लिए बड़े अवसर अभी शुरू हुए हैं। कार्यक्रम के समापन सत्र में भारत-यूके और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी चर्चा हुई। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और ब्रिटेन के ट्रेड कमिश्नर हरजिंदर कंग ने नए व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय ऑटो कंपोनेंट कंपनियों, खासकर MSME क्षेत्र, के लिए वैश्विक बाजार में बढ़ते अवसरों पर जोर दिया।
