Mahindra की फैक्ट्रियों में मजदूरों का संकट, Thar और XUV के प्रॉडक्शन पर ब्रेक

Mahindra की फैक्ट्रियों में मजदूरों का संकट, Thar और XUV के प्रॉडक्शन पर ब्रेक

नई दिल्ली : इंडिया की प्रमुख SUV निर्माता Mahindra & Mahindra को जून 2026 में बड़ा झटका लगा है। कंपनी के कुछ प्रमुख पार्ट्स सप्लायर्स में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की भारी कमी के कारण SUV उत्पादन में 15 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका है। इसका सीधा असर कंपनी की लोकप्रिय SUVs, Mahindra XUV 7XO और Mahindra Thar के उत्पादन पर पड़ रहा है। महिंद्रा के एक बड़े सप्लायर के यहां 20-25 प्रतिशत तक पार्ट्स की कमी हो गई है, जिससे कंपनी के उत्पादन संयंत्रों की रफ्तार प्रभावित हुई है। महिंद्रा की पेट्रोल और डीजल वाहनों की कुल मासिक उत्पादन क्षमता लगभग 57,000 यूनिट है, लेकिन मौजूदा हालात में इस क्षमता का पूरा उपयोग करना मुश्किल हो रहा है।

ऑटो उद्योग के जानकारों का कहना है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में न्यूनतम मजदूरी बढ़ने से प्रवासी मजदूर अब अपने गृह राज्यों में ही काम करना पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा सरकारी कल्याण योजनाएं, ई-रिक्शा जैसे स्वरोजगार के अवसर और गांवों में बेहतर आर्थिक संभावनाओं ने भी पश्चिमी भारत के औद्योगिक केंद्रों की ओर होने वाले पलायन को कम किया है।

पुणे स्थित इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता EKA Mobility के संस्थापक और चेयरमैन Sudhir Mehta के अनुसार पुणे और औरंगाबाद के ऑटो क्लस्टर्स में श्रमिकों की उपलब्धता और मांग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। चुनाव और फसल कटाई के मौसम के चलते कई श्रमिक अपने राज्यों को लौट गए और वापस नहीं आए। वहीं ऑटो लाइटिंग सप्लायर Neolite ZKW Lightings के CEO Rajesh Soni का कहना है कि यह समस्या अब केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सामने चुनौती बन गई है।

स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है क्योंकि SUVs की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। महिंद्रा की SUV बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में 19 प्रतिशत बढ़कर 6.6 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई थी। चालू वित्त वर्ष में भी कंपनी की SUV बिक्री अप्रैल में 8 प्रतिशत और मई में 11 प्रतिशत बढ़ी है एक तरफ ग्राहकों की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों और पार्ट्स की कमी उत्पादन पर दबाव बना रही है। इससे आने वाले महीनों में कुछ मॉडलों की वेटिंग अवधि बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां तेजी से ऑटोमेशन, स्किल डेवलपमेंट और कर्मचारी रिटेंशन पर ध्यान नहीं देतीं तो आने वाले समय में उत्पादन प्रभावित हो सकता है। फिलहाल महिंद्रा समेत कई कंपनियां इस चुनौती से निपटने के लिए नए समाधान तलाश रही हैं, लेकिन श्रमिकों की कमी भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही है।