नई दिल्ली/खरखौदा। Maruti Suzuki India Limited की हरियाणा के आईएमटी खरखौदा में बनी अत्याधुनिक वाहन निर्माण इकाई का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने किया, जहां 35,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश और 10 लाख यूनिट सालाना क्षमता के साथ यह प्लांट भारत-जापान औद्योगिक साझेदारी का बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है।
मारुति सुजुकी ने खोला नया ऑटो अध्याय, खरखौदा में शुरू हुआ मेगा प्लांट
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India Limited ने हरियाणा के आईएमटी खरखौदा में अपनी सबसे आधुनिक वाहन निर्माण इकाई शुरू कर दी है। इस प्लांट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। यह सिर्फ एक नए कारखाने की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के अगले बड़े दौर की शुरुआत मानी जा रही है। कंपनी के लिए भी यह चार दशक से ज्यादा की भारत यात्रा का बड़ा पड़ाव है और भारत-जापान साझेदारी को नई मजबूती देने वाला कदम भी।
800 एकड़ में फैला प्लांट, अभी 5 लाख गाड़ियां, आगे 10 लाख सालाना क्षमता
खरखौदा में बना यह नया प्लांट करीब 800 एकड़ में फैला है और इसके साथ इंटीग्रेटेड सप्लायर पार्क भी विकसित किया गया है। फिलहाल इस यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 5 लाख वाहन है, लेकिन कंपनी की योजना इसे बढ़ाकर 10 लाख यूनिट प्रति वर्ष तक ले जाने की है। जब यह प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर काम करेगा, तब यह दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माण इकाइयों में शामिल होगा। यही वजह है कि इस परियोजना को मारुति सुजुकी के भविष्य के सबसे बड़े विस्तारों में से एक माना जा रहा है।
35,000 करोड़ का निवेश, 21,000 से ज्यादा रोजगार की तैयारी
इस प्लांट पर कुल अनुमानित निवेश 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है। कंपनी के मुताबिक, यह निवेश सिर्फ एक फैक्टरी खड़ी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए आसपास के औद्योगिक नेटवर्क, सप्लायर इकोसिस्टम और रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे। अनुमान है कि इस परियोजना से 21,000 से ज्यादा रोजगार पैदा होंगे। यानी खरखौदा प्लांट सिर्फ कार उत्पादन का केंद्र नहीं बनेगा, बल्कि हरियाणा और आसपास के इलाके में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा इंजन भी साबित हो सकता है।
मारुति का दावा— दुनिया के सबसे बड़े कार प्लांट्स में शामिल होगा खरखौदा
मारुति सुजुकी ने साफ कहा है कि जब यह प्लांट 10 लाख यूनिट सालाना क्षमता तक पहुंचेगा, तब यह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी वाहन निर्माण सुविधाओं में गिना जाएगा। कंपनी का बड़ा लक्ष्य अपनी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता को 40 लाख यूनिट तक ले जाना है और खरखौदा प्लांट उसमें अहम भूमिका निभाएगा। यानी यह यूनिट सिर्फ एक नया प्लांट नहीं, बल्कि मारुति के दीर्घकालिक विस्तार और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने की रणनीति का केंद्र है।
‘सुजुकी स्मार्ट फैक्ट्री’ मॉडल पर बना प्लांट, तकनीक पर खास जोर
खरखौदा प्लांट की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सुजुकी स्मार्ट फैक्ट्री’ कॉन्सेप्ट है। इसका मतलब यह है कि यहां मैन्युफैक्चरिंग के दौरान आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर प्रक्रिया की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। इससे सुरक्षा, गुणवत्ता और उत्पादकता बेहतर होगी, वहीं ऊर्जा की खपत को भी कम किया जा सकेगा। कंपनी का कहना है कि यह प्लांट सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की स्मार्ट और दक्ष मैन्युफैक्चरिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
इंडस्ट्री 5.0 की एंट्री, इंसान और मशीन साथ करेंगे काम
मारुति सुजुकी ने इस प्लांट में इंडस्ट्री 5.0 के सिद्धांतों को भी शामिल किया है। इसका मतलब यह है कि यहां सिर्फ ऑटोमेशन नहीं होगा, बल्कि ह्यूमन-अवेयर कोलैबोरेटिव रोबोट्स (कोबोट्स) जैसे सिस्टम लगाए गए हैं, जो इंसानों के साथ मिलकर काम करेंगे। आसान भाषा में कहें तो फैक्ट्री के भीतर मशीनें सिर्फ आदेश मानने वाली नहीं होंगी, बल्कि वे इस तरह डिजाइन की गई हैं कि मानव कर्मचारियों के साथ तालमेल बनाकर बेहतर, सुरक्षित और तेज उत्पादन कर सकें। कंपनी इसे ग्लोबल क्वालिटी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
पूरी बिजली नवीकरणीय स्रोतों से, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
खरखौदा प्लांट को सिर्फ बड़ा नहीं, बल्कि सस्टेनेबल भी बनाने की कोशिश की गई है। कंपनी के मुताबिक, इस यूनिट की 100 फीसदी बिजली जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी की जाएगी। इसके लिए सोलर एनर्जी, बायोगैस, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और ग्रीन पावर प्रोक्योरमेंट जैसे विकल्पों को शामिल किया गया है। यह पहल इसलिए अहम है क्योंकि ऑटो सेक्टर में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन फुटप्रिंट कम करना अब बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में मारुति सुजुकी का यह प्लांट “ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग” मॉडल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भारत-जापान साझेदारी का नया चेहरा बना खरखौदा प्लांट
इस उद्घाटन को सिर्फ कॉरपोरेट इवेंट नहीं, बल्कि भारत-जापान आर्थिक रिश्तों के बड़े प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की मौजूदगी ने इस परियोजना की अहमियत और बढ़ा दी। सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधि निदेशक और अध्यक्ष तोशिहिरो सुजुकी ने कहा कि यह प्लांट भारत-जापान साझेदारी और ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता का बड़ा उदाहरण है। उनके मुताबिक, भारत में बेहतर नीतिगत माहौल की वजह से सुजुकी निवेश, रोजगार, निर्यात और नई तकनीकों के मोर्चे पर अपनी रफ्तार बढ़ा रही है।
भारत अब सुजुकी के लिए सिर्फ बाजार नहीं, ग्लोबल प्रोडक्शन हब भी
तोशिहिरो सुजुकी ने यह भी कहा कि सुजुकी समूह के भीतर भारत की अहमियत लगातार बढ़ी है। उन्होंने उदाहरण दिया कि सुजुकी का पहला बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन ई-विटारा भारत में मारुति सुजुकी के गुजरात प्लांट में बनाया जा रहा है और वहां से इसे 100 देशों में निर्यात किया जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ अब सिर्फ नारा नहीं रह गया है, बल्कि भारत में बने वाहन वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं। यह भारत की निर्माण क्षमता, गुणवत्ता और तकनीकी विश्वसनीयता पर बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
