इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कंपनी Motovolt Mobility ने अगस्त 2026 में अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री दर्ज करते हुए 1,365 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर कराए हैं। कंपनी ने महीने-दर-महीने आधार पर 108% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की और VAHAN पोर्टल पर देश की Top 10 EV कंपनियों में जगह बना ली। कंपनी की सालाना वृद्धि 500% से ज्यादा रही है। खास बात यह है कि पूर्वी भारत से Top 10 में जगह बनाने वाली Motovolt एकमात्र EV कंपनी है।
कंपनी के मुताबिक अगस्त का प्रदर्शन उसके लिए बड़ा मील का पत्थर है। Motovolt ने खास तौर पर कमर्शियल इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है। कंपनी कई शहरों में फ्लीट ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही कंपनी अपने रिटेल नेटवर्क को बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर व तेज सर्विस देने पर भी काम कर रही है।
Motovolt के M7 इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग में तेजी कंपनी की बिक्री बढ़ने की बड़ी वजह रही। M7 रेंज में Indofast Energy और Yuma Energy की बैटरी स्वैपिंग तकनीक से चलने वाले मॉडल भी शामिल हैं। बैटरी बदलने की सुविधा खास तौर पर कमर्शियल इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए उपयोगी है, क्योंकि इससे वाहन को लंबे समय तक चलाना आसान होता है और चार्जिंग के लिए रुकने का समय कम हो जाता है।
कंपनी के मुताबिक M7 को फ्लीट ऑपरेटरों के साथ-साथ ऐसे व्यक्तिगत ग्राहक भी पसंद कर रहे हैं, जिन्हें रोजाना ज्यादा दूरी तय करनी होती है और भरोसेमंद, कम खर्च वाली मोबिलिटी की जरूरत होती है। कंपनी का फोकस ऐसे इलेक्ट्रिक वाहनों पर है, जो रोजमर्रा के काम और कमाई दोनों में मदद कर सकें।
Motovolt Mobility के Founder और CEO Tushar Choudhary ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और सरकारी प्रोत्साहनों से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग बढ़ रही है। कंपनी ने अपने फ्लीट पार्टनर्स और ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर वाहन तैयार किए हैं। VAHAN की Top 10 EV कंपनियों में शामिल होना भरोसेमंद और किफायती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तैयार करने की दिशा में कंपनी के काम की पुष्टि है।
कंपनी के मुताबिक अब तक 35,000 से ज्यादा वाहन ग्राहकों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इन वाहनों ने कुल मिलाकर 6.5 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा की इलेक्ट्रिक यात्रा पूरी की है। कंपनी का दावा है कि उसके वाहनों के इस्तेमाल से अब तक करीब 17 लाख लीटर ईंधन की बचत हुई है और 37 लाख किलोग्राम से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिली है।
