अब दोपहिया वाहनों की भी होगी फ्यूल एफिशिएंसी की रेटिंग, नए CO₂ उत्सर्जन मानक आएंगे
टू वीलर के लिए नई नीति की दस्तक, इंडस्ट्री में हलचल
भारत सरकार ने पहली बार दोपहिया वाहनों (Two-Wheelers) को भी Corporate Average Fuel Efficiency (CAFE) मानकों के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ने वाहन निर्माताओं के साथ औपचारिक परामर्श शुरू कर दिया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो मोटरसाइकिल और स्कूटर बनाने वाली कंपनियों को पूरे बेड़े (Fleet) की औसत ईंधन दक्षता और CO₂ उत्सर्जन के निर्धारित लक्ष्य पूरे करने होंगे।
CAFE (Corporate Average Fuel Efficiency) ऐसे मानक हैं जिनके तहत किसी वाहन निर्माता की पूरी सालाना बिक्री की औसत ईंधन खपत और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को नियंत्रित किया जाता है। यह नियम किसी एक मॉडल पर नहीं, बल्कि कंपनी के पूरे वाहन पोर्टफोलियो पर लागू होते हैं।
BEE ने हाल ही में सभी दोपहिया निर्माताओं के साथ बैठक की। इसमें Hero MotoCorp, Bajaj Auto और TVS Motor जैसी कंपनियों ने कहा कि सरकार के पास उपलब्ध आंकड़े वर्ष 2021-22 के हैं, जबकि अब देश में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू हो चुका है। कंपनियों का कहना है कि नए ईंधन के आधार पर ताजा डेटा तैयार करने के लिए कम से कम छह महीने का समय दिया जाए। निर्माताओं को ईंधन दक्षता, प्रमाणित CO₂ उत्सर्जन और अन्य तकनीकी आंकड़े BEE को उपलब्ध कराने होंगे। इन आंकड़ों का मूल्यांकन करने के लिए BEE ने अलग तकनीकी समिति भी गठित की है।
सरकार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए 5-स्टार ऊर्जा दक्षता रेटिंग भी लाने की तैयारी कर रही है। एयर कंडीशनर और अन्य घरेलू उपकरणों की तरह यह रेटिंग खरीदारों को बताएगी कि वाहन कितना ऊर्जा-कुशल है। शुरुआती दो वर्षों तक यह रेटिंग स्वैच्छिक (Voluntary) रहेगी। बाद में इसे अनिवार्य बनाया जा सकता है।
नई CAFE व्यवस्था के साथ-साथ दिल्ली सरकार की प्रस्तावित EV नीति भी दोपहिया उद्योग की चिंता बढ़ा रही है। प्रस्ताव के अनुसार अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही पंजीकरण किया जाएगा।
उद्योग संगठन SIAM का कहना है कि BS-IV से पहले के दोपहिया वाहन लगभग 99.5% पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।
SIAM के अनुसार, दिल्ली में बिकने वाले लगभग दो-तिहाई दोपहिया वाहन मोटरसाइकिलें हैं, जबकि इस श्रेणी में अभी किफायती और व्यावहारिक इलेक्ट्रिक विकल्प सीमित हैं। इसके अलावा, EV निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट और कुछ महत्वपूर्ण पुर्जों के लिए चीन पर निर्भरता भी उद्योग की बड़ी चिंता बनी हुई है। यदि दोपहिया CAFE नियम लागू होते हैं तो कंपनियों को अधिक ईंधन-कुशल इंजन और हाइब्रिड/इलेक्ट्रिक तकनीक अपनानी पड़ेगी।
