गन्ने का रस नहीं मिलता पेट्रोल में
भारत ही नहीं, अमेरिका और ब्राजील में भी इस्तेमाल हो रहा है इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से भारत को अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर वायरल हो रहे दावों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि E20 ईंधन से इंजन खराब होने, बीमा क्लेम खारिज होने, पेट्रोल में पानी मिलने या चींटियां आकर्षित होने जैसे दावे पूरी तरह भ्रामक, निराधार और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और अफवाहों की जगह वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें।
मंत्रालय ने कहा कि भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blended Petrol Programme) E20 ईंधन को देशभर में लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों, ईंधन परीक्षण एजेंसियों और अन्य विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा किया गया था।
सरकार के अनुसार वर्ष 2023 से देशभर में E20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद अब तक इथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने जैसी कोई प्रमाणित घटना सामने नहीं आई है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ कि इथेनॉल पानी को तेजी से सोखता है, जिससे इंजन खराब हो सकता है। इस पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन टैंक में पानी का प्रवेश किसी भी प्रकार के पेट्रोल के लिए नुकसानदायक होता है, चाहे उसमें इथेनॉल मिला हो या नहीं। आधुनिक वाहनों में ऐसे सुरक्षा प्रावधान मौजूद हैं, जो ईंधन प्रणाली में पानी जाने से रोकते हैं।
सरकार ने उन वायरल विडियो को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया कि गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जाता है। मंत्रालय ने कहा कि ईंधन ग्रेड इथेनॉल कई औद्योगिक प्रक्रियाओं, जैसे फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन से गुजरने के बाद तैयार होता है। यह गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), मक्का या टूटे हुए चावल जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है, लेकिन अंतिम इथेनॉल का इन मूल पदार्थों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहता।
हाल ही में एक विडियो में वाहन के फ्यूल कैप के पास चींटियां दिखाई गईं और दावा किया गया कि E20 पेट्रोल में चीनी होने के कारण ऐसा हो रहा है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने स्पष्ट किया कि ईंधन ग्रेड इथेनॉल में किसी प्रकार की शर्करा (चीनी) नहीं होती। सरकार ने कहा कि केवल E20 ईंधन इस्तेमाल करने के कारण किसी वाहन का बीमा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता।
सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल मिश्रण केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में वर्षों से सफलतापूर्वक लागू है। ब्राजील में तो E27 यानी 27 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग किया जाता है, जो भारत के E20 से भी अधिक है। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से भारत को अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
