• रजिस्ट्रेशन के बिना MAHINDRA SUV सौंपना पड़ा महंगा, आयोग का बड़ा फैसला
• कार खरीदी, हादसा हुआ, बीमा भी नहीं मिला, आखिरकार आयोग ने दिलाया इंसाफ
जयपुर, 26 जून। बिना रजिस्ट्रेशन के नई एसयूवी ग्राहक को सौंपना एक कार डीलर को महंगा पड़ गया। राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में महिंद्रा की बिना पंजीकरण वाली एसयूवी ग्राहक को सौंपने के मामले में डीलर को लापरवाह ठहराते हुए 3 लाख रुपये से अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन का रजिस्ट्रशन कराना डीलर की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसे पूरी तरह ग्राहक पर नहीं छोड़ा जा सकता।
7 नवंबर 2016 का है। हनुमानगढ़ निवासी श्रवण राम ने जयपुर स्थित के.एस. मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 7 लाख रुपये में महिंद्रा की एक एसयूवी खरीदी थी। डिलीवरी मिलने के तुरंत बाद जब वह वाहन को घर लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में एसयूवी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसे भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि हादसे में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन बाद में बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया क्योंकि दुर्घटना के समय वाहन का न तो अस्थायी (टेम्परेरी) और न ही स्थायी (परमानेंट) रजिस्ट्रेशन हुआ था।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग की पीठ के सदस्य ए.के. अग्रवाल और आर.एन. सरस्वत ने कहा कि डीलर ने ग्राहक से पंजीकरण शुल्क लेने के बावजूद वाहन का रजिस्ट्रेशन कराए बिना उसे सौंप दिया, जो केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम-42 का उल्लंघन है। आयोग ने माना कि इस मामले में डीलर स्पष्ट रूप से लापरवाही का दोषी है। हालांकि आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले को भी सही ठहराया। आयोग ने कहा कि बिना पंजीकरण वाले वाहन को सड़क पर चलाना बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है, इसलिए बीमा कंपनी का क्लेम खारिज करना उचित था। दुर्घटनाग्रस्त एसयूवी की मरम्मत का अनुमानित खर्च 8.38 लाख रुपये था, जबकि वाहन का बीमित मूल्य 6.15 लाख रुपये था।
जिला उपभोक्ता आयोग ने 11 मई 2022 को दिए अपने आदेश में डीलर को इंश्योरेंस राशि का 50 प्रतिशत यानी 3.07 लाख रुपये मुआवजे के रूप में देने, दुर्घटना की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने तथा 5-5 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करने का निर्देश दिया था। राज्य आयोग ने इस आदेश को बरकरार रखा।
आयोग ने यह भी माना कि इस मामले में डीलर और ग्राहक दोनों की आंशिक जिम्मेदारी बनती है। जहां डीलर ने बिना रजिस्ट्रेशन वाहन सौंपकर लापरवाही की, वहीं ग्राहक ने भी वाहन का पंजीकरण सुनिश्चित किए बिना उसे सड़क पर चलाया। डीलर के.एस. मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने जिला आयोग के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन आयोग ने 22 जून 2026 को उसकी अपील खारिज करते हुए मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।
