ज़रा बचके, ज़रा हटके…! महिलाएं बनीं सेफ ड्राइवर, रात 9-10 बजे हादसों का ज़्यादा खतरा

ज़रा बचके, ज़रा हटके…! महिलाएं बनीं सेफ ड्राइवर, रात 9-10 बजे हादसों का ज़्यादा खतरा

तेज ब्रेक और तूफानी रफ्तार पड़ रही भारी, सड़क हादसों पर रिपोर्ट ने बजाई खतरे की घंटी

नई दिल्ली। अगर आप रोजाना रात 9 से 10 बजे के बीच वाहन लेकर सड़क पर निकलते हैं तो अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक नए अध्ययन में इस समय को दिन का सबसे जोखिम भरा ड्राइविंग स्लॉट बताया गया है। इसी रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में थोड़ा अधिक सुरक्षित तरीके से वाहन चलाती हैं। 17 राज्यों में 45 लाख ट्रिप और 5.5 करोड़ किलोमीटर की ड्राइविंग का विश्लेषण करने के बाद तैयार हुई रिपोर्ट बताती है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ड्राइवर का व्यवहार होता है, न कि उसकी उम्र या लिंग।
जूनो जनरल इंश्योरेंस की इंडिया रोड सेफ्टी रिपोर्ट-2026 के मुताबिक शाम 8 बजे के बाद ड्राइविंग का जोखिम लगातार बढ़ने लगता है। रात 9 से 10 बजे के बीच दुर्घटना की आशंका सबसे अधिक रहती है। इसके विपरीत दोपहर 1 से 2 बजे का समय वाहन चलाने के लिए सबसे सुरक्षित पाया गया। रिपोर्ट ने वर्षों से चली आ रही उस धारणा को भी चुनौती दी है कि पुरुष बेहतर ड्राइवर होते हैं। अध्ययन में महिलाओं का औसत ड्राइविंग स्कोर 92.86 रहा, जबकि पुरुषों का स्कोर 92.43 दर्ज किया गया। भारत में 80 प्रतिशत से अधिक सड़क दुर्घटनाएं ड्राइविंग व्यवहार से जुड़ी होती हैं। हादसों की वजह वाहन की क्षमता या चालक की उम्र नहीं, बल्कि उसकी आदतें बनती हैं। विश्लेषण में अचानक तेज ब्रेक लगाना और बिना जरूरत तेजी से एक्सीलरेशन देना सबसे कमजोर ड्राइविंग आदतों के रूप में सामने आए। यही दोनों व्यवहार सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं। बारिश, सर्दियों का कोहरा या मौसम में बदलाव का ड्राइविंग स्कोर पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 1.73 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो जाती है, जो दुनिया में होने वाली कुल सड़क दुर्घटना मौतों का लगभग 11 प्रतिशत है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान होता है और हर वर्ष जीडीपी का 3 से 5 प्रतिशत तक प्रभावित होता है। सबसे अधिक जान दोपहिया वाहन चालकों की जाती है, जिनकी हिस्सेदारी सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों का 44 प्रतिशत है। वहीं 19 प्रतिशत मौतें पैदल चलने वालों की होती हैं।
सड़क सुरक्षा में असली बदलाव तब होगा, जब चालक अपनी ड्राइविंग आदतों में सुधार करेंगे, गति पर नियंत्रण रखेंगे, अचानक ब्रेक लगाने और बेवजह तेज रफ्तार से बचेंगे।