अब डीजल नहीं, EV और रेलवे से दौड़ेगा माल; कंपनियों का ग्रीन मिशन तेज

नई दिल्ली: ईंधन खपत कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की अपील का असर अब देश की बड़ी कंपनियों में साफ दिखाई देने लगा है। FMCG, ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब तेजी से Green Logistics की ओर बढ़ रही हैं। कंपनियां अपने ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में EV, रेलवे और वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाकर खर्च घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

PepsiCo ने इस साल मार्च में Kosi-Pataudi रूट पर अपना EV Green Corridor शुरू किया था। अब कंपनी इसे दूसरे रूट्स तक बढ़ाने की तैयारी में है। साल के अंत तक PepsiCo अपने करीब 30% प्लांट-टू-वेयरहाउस शटल्स को ग्रीन ट्रांसपोर्ट में बदलना चाहती है। फिलहाल कंपनी हर साल लगभग 4.8 लाख इलेक्ट्रिक किलोमीटर का संचालन कर रही है। PepsiCo ने Kalyani Powertrain के साथ मिलकर EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना शुरू किया है।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता Maruti Suzuki भी ग्रीन लॉजिस्टिक्स की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। कंपनी अगले पांच वर्षों में अपने 35% वाहनों की ढुलाई रेलवे के जरिए करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो फिलहाल करीब 26% है। इसके लिए Maruti Suzuki ने Hansalpur और Manesar में रेलवे साइडिंग, लॉजिस्टिक्स हब और विशेष ऑटोमोबाइल रैक तैयार करने पर 1,370 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। कंपनी अब अपने नए Kharkhoda प्लांट में भी रेलवे साइडिंग स्थापित करने की योजना बना रही है, जिससे ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सड़क जाम की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

Dabur India भी तेजी से Green Supply Chain की तरफ बढ़ रही है। कंपनी ने अपनी सप्लाई चेन में 40 से 50 EV पहले ही तैनात कर दिए हैं। Dabur ने रेलवे ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को तीन गुना तक बढ़ा दिया है और अब बड़े क्षमता वाले EV ट्रकों को अपनाने के लिए वाहन कंपनियों और स्टार्टअप्स से बातचीत कर रही है।इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की बढ़ती मांग का फायदा Tata Motors को भी मिल रहा है। कंपनी अब तक 17 हजार Electric Small Commercial Vehicles (eSCVs) डिलीवर कर चुकी है और इस सेगमेंट में लगभग 44% बाजार हिस्सेदारी रखती है। FY26 में Tata Motors के eSCV वॉल्यूम दोगुने हो गए और Q4 में 2,400 से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री दर्ज हुई।