• TVS, HERO और ATHER ने बढ़ाई R&D की रफ्तार
• सॉफ्टवेयर से AI तक, भारतीय दोपहिया कंपनियां बदल रहीं गेम
नई दिल्ली। भारतीय दोपहिया उद्योग अब सिर्फ इंजन और मैकेनिकल तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कनेक्टेड फीचर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्टवेयर आधारित वाहनों की बढ़ती मांग के बीच कंपनियों ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। TVS मोटर, हीरो मोटोकॉर्प और एथर एनर्जी इस दौड़ में प्रमुख कंपनियों के तौर पर उभर रही हैं।
TVS मोटर ने FY26 में R&D पर 1,254 करोड़ रुपये खर्च किए। यह FY25 के 1,025 करोड़ रुपये और FY24 के 645 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। कंपनी के 2,000 से ज्यादा इंजीनियर इलेक्ट्रिफिकेशन, कनेक्टेड प्लेटफॉर्म, AI आधारित डिजाइन और नई पीढ़ी के इंजन पर काम कर रहे हैं। कंपनी का R&D नेटवर्क होसुर, बोलोग्ना, जकार्ता और सोलिहल तक फैला हुआ है। इससे अलग-अलग बाजारों के इंजीनियरिंग और डिजाइन अनुभव को एक साथ लाने में मदद मिल रही है।
हीरो मोटोकॉर्प ने FY26 में R&D पर 1,129 करोड़ रुपये खर्च किए। FY25 में यह आंकड़ा 1,039 करोड़ रुपये था। कंपनी का R&D खर्च उसके राजस्व का करीब 2.4 फीसदी रहा। हीरो अब कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, कम उत्सर्जन वाले पावरट्रेन और डिजिटल फीचर्स पर काम कर रही है। कंपनी 1,300 से ज्यादा पेटेंट दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा राइड-बाय-वायर, ट्रैक्शन कंट्रोल और कस्टमाइज करने योग्य राइडिंग मोड जैसे फीचर्स को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम हो रहा है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनी एथर एनर्जी ने FY26 में R&D पर 448 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि FY25 में यह 345 करोड़ रुपये था। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के 856 इंजीनियर उसके कुल ऑन-रोल कर्मचारियों का करीब 42 फीसदी थे। एथर का R&D काम वाहन प्लेटफॉर्म, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, चार्जिंग और कंपोनेंट इंजीनियरिंग तक फैला है। कंपनी ने FY26 में 283 पेटेंट दाखिल किए और उसके कुल पेटेंट फाइलिंग की संख्या 643 हो गई। EL और Zenith जैसे नए प्लेटफॉर्म कंपनी के अगले उत्पाद विस्तार की नींव बन सकते हैं।
बजाज ऑटो ने भी FY26 में R&D पर खर्च बढ़ाकर 693 करोड़ रुपये कर दिया, जो पिछले साल 626 करोड़ रुपये था। हालांकि बिक्री में R&D खर्च की हिस्सेदारी 1.3 फीसदी से घटकर 1.2 फीसदी रह गई।
भारतीय दोपहिया कंपनियां परंपरागत रूप से विकसित देशों की बड़ी ऑटो कंपनियों की तुलना में R&D पर कम खर्च करती रही हैं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों, प्रीमियम मोटरसाइकिलों, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर आधारित फीचर्स के बढ़ते इस्तेमाल ने कंपनियों को इंजीनियरिंग और रिसर्च में ज्यादा निवेश के लिए प्रेरित किया है। आने वाले समय में दोपहिया बाजार की प्रतिस्पर्धा सिर्फ इंजन, माइलेज और कीमत पर नहीं होगी। बैटरी, सॉफ्टवेयर, कनेक्टिविटी, AI और स्मार्ट फीचर्स भी कंपनियों की तकनीकी ताकत तय करेंगे।
