• विजय पसुपति को मिली CEO की कमान, N.A.N. Silox GreenMet का ₹1,400 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
• बैटरी रीसाइक्लिंग से कैथोड मटेरियल तक, भारत की बैटरी सप्लाई चेन को मिलेगी नई ताकत! आंध्र प्रदेश में शुरू हुआ मेगा प्लांट का निर्माण
• लिथियम-आयन बैटरी की दुनिया में बड़ा कदम! 40,000 टन सालाना श्रेडिंग क्षमता वाला प्लांट होगा तैयार
• बैटरी के कचरे से कीमती धातुओं तक, N.A.N. Silox GreenMet बनाएगी भारत में नया इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम
इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती मांग के बीच भारत में बैटरी के अहम मटेरियल की घरेलू सप्लाई मजबूत करने की तैयारी तेज हो गई है। N.A.N. Silox GreenMet ने विजय पसुपति को अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। कंपनी आंध्र प्रदेश के नायडुपेटा में करीब 1,400 करोड़ रुपये की लागत से लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग और क्रिटिकल मेटल रिकवरी प्लांट विकसित कर रही है। कंपनी को इसके लिए Consent to Establish (CTE) मिल गया है।
कंपनी की योजना केवल पुरानी बैटरियों से उपयोगी धातुएं निकालने तक सीमित नहीं है। वह आगे चलकर बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर कैथोड एक्टिव मटेरियल (pCAM) और कैथोड एक्टिव मटेरियल (CAM) के उत्पादन में भी विस्तार करना चाहती है।
आंध्र प्रदेश के नायडुपेटा में विकसित हो रहे इस प्लांट की पूरी क्षमता 40,000 टन सालाना बैटरी श्रेडिंग और 20,000 टन सालाना हाइड्रोमेटलर्जिकल प्रोसेसिंग की होगी। हाइड्रोमेटलर्जिकल तकनीक के जरिए इस्तेमाल की जा चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से महत्वपूर्ण धातुओं को रिकवर और रिफाइन किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से उच्च शुद्धता वाले बैटरी-ग्रेड सॉल्ट तैयार किए जाएंगे। इनका इस्तेमाल आगे pCAM और CAM जैसे कैथोड मटेरियल बनाने में किया जा सकता है।
भारत में बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है, लेकिन प्रोसेस्ड कैथोड मटेरियल की सप्लाई के लिए देश अभी भी विदेशी बाजारों पर काफी निर्भर है। कंपनी का लक्ष्य बैटरी रीसाइक्लिंग से हासिल क्रिटिकल मेटल को देश में ही प्रोसेस करके उच्च मूल्य वाले बैटरी मटेरियल में बदलना है।
इससे घरेलू बैटरी सप्लाई चेन को मजबूती मिल सकती है और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
विजय पसुपति को औद्योगिक क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। वह इससे पहले Epsilon Advanced Materials में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के पद पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें Orbia और EY में भी वरिष्ठ भूमिकाओं का अनुभव है।
N.A.N. Silox GreenMet शुरुआती 1,400 करोड़ रुपये के निवेश के अलावा डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग में अतिरिक्त निवेश की संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी pCAM और CAM उत्पादन के लिए वैश्विक तकनीकी साझेदारों के साथ बातचीत कर रही है।
इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और सेल मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार के साथ लिथियम-आयन बैटरियों की रीसाइक्लिंग और महत्वपूर्ण धातुओं की रिकवरी की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसी परियोजनाएं इस्तेमाल की जा चुकी बैटरियों से मूल्यवान मटेरियल वापस हासिल करने और उन्हें दोबारा उत्पादन चक्र में लाने में मदद कर सकती हैं।
