जर्मन लग्ज़री कारें, BMW और Mercedes 20-30 लाख तक हो हो सकती हैं सस्ती

जर्मन लग्ज़री कारें, BMW और Mercedes 20-30 लाख तक हो हो सकती हैं सस्ती

नई दिल्ली: इंडियन गवर्नमेंट और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) डील अब आखिरी चरण में पहुंच गई है। इससे Volkswagen, BMW और Mercedes जैसी यूरोपीय लग्ज़री कारों की कीमतें काफी कम हो सकती हैं। इंडिया और यूरोप के बीच ऐसा समझौता है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर टैक्स (ड्यूटी) कम कर दें। जब यह समझौता लागू होगा तो यूरोप से आने वाली कारों पर भारी टैक्स कम हो जाएगा। इसलिए Volkswagen, BMW, Mercedes जैसी लग्ज़री कारें सस्ती हो सकती हैं।

इंडिया में पूरी तरह इंपोर्टेड कारों पर 70% से 110% तक टैक्स लगता है। विदेश में 30 लाख रुपये की कार भारत में 60–70 लाख रुपये की हो जाती है।अगर टैक्स कम हुआ तो BMW, Mercedes, Volkswagen की कीमतें 20–30 लाख तक घट सकती हैं।
जब कोई कार विदेश से पूरी तरह तैयार होकर इंडिया आती है, तो सरकार उस पर बहुत भारी टैक्स लगाती है। इसी टैक्स को इंपोर्ट ड्यूटी कहते हैं। अभी विदेशी कारों पर 70% से 110% तक टैक्स लगता है।

अगर किसी BMW या Mercedes की असली कीमत ₹30 लाख है तो टैक्स लगाकर उसकी कीमत ₹50–60 लाख या उससे भी ज्यादा हो जाती है। सरकार यूरोप (EU) से आने वाली कुछ कारों पर टैक्स कम करने की सोच रही है। टैक्स 110% से घटाकर 40% किया जा सकता है। धीरे-धीरे टैक्स को 10% तक लाने का प्रस्ताव है। अगर टैक्स 10% हुआ तो 33 लाख लगता है। कार 30 लाख सस्ती तक हो सकती है।

सरकार की योजना है कि शुरुआत में हर साल करीब 2 लाख पेट्रोल और डीज़ल कारों पर कम टैक्स लगाया जाए। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है और यहां हर साल करीब 44 लाख कारें बिकती हैं, लेकिन यूरोपीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी अभी 4% से भी कम है। टैक्स कम होने से इन कंपनियों के लिए भारत में ज्यादा मॉडल लॉन्च करना और निवेश बढ़ाना आसान हो जाएगा। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक हुआ तो आने वाले समय में भारतीय ग्राहक लग्ज़री जर्मन कारें पहले से काफी सस्ती कीमत पर खरीद पाएंगे।