इंडिया बनेगा ग्लोबल चिप हब, सरकार ने आसान किए SEZ नियम

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर Tata Semiconductor Manufacturing Private Limited की ओर से गुजरात के धोलेरा में एक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) बनाने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह SEZ खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और IT/ITES सेवाओं के लिए समर्पित होगा।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बताया कि यह SEZ करीब 66.166 हेक्टेयर जमीन में फैला होगा। देश के पहले चिप फैब्रिकेशन प्लांट से लगभग 21,000 नौकरियों के मौके पैदा होने की उम्मीद है। यह SEZ इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और IT आधारित सेवाओं को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक विशेष अप्रूवल सिस्टम भी होगा, जिससे कामकाज और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाया जा सके।

सरकार काफी समय से कोशिश कर रही है कि भारत सिर्फ मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक्स का बाजार ही न रहे, बल्कि सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने के क्षेत्र में बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बने। इसी के चलते स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन से जुड़े नियमों को आसान बनाया गया है। पहले SEZ बनाने के लिए कम से कम 50 हेक्टेयर जमीन जरूरी होती थी। अब सरकार ने इस शर्त को घटाकर सिर्फ 10 हेक्टेयर कर दिया है, जिससे ज्यादा कंपनियों के लिए रास्ता खुल गया है और वे आसानी से भारत में अपना प्रोजेक्ट शुरू कर सकती हैं।

जमीन से जुड़े नियमों में भी ढील दी गई है। पहले जमीन पर कई तरह की कानूनी जटिलताएं होती थीं, जिससे प्रोजेक्ट शुरू होने में देरी होती थी, लेकिन अब इन प्रक्रियाओं को आसान कर दिया गया है। इससे कंपनियों का एक्सपोर्ट प्रदर्शन बेहतर दिखेगा। अब SEZ में बनने वाले प्रोडक्ट्स को भारत के भीतर भी बेचा जा सकता है।

SEZ बोर्ड ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी भी दी है। जैसे Micron Semiconductor Technology India Pvt Ltd गुजरात के साणंद में करीब 13,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर की असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग के लिए SEZ बना रही है। वहीं Aequs Group कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए SEZ स्थापित कर रही है। इससे देश में लोकल सप्लाई चेन मजबूत होगी, हाई-स्किल जॉब्स बढ़ेंगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।