नई दिल्ली: Rocklink India ने उत्तर प्रदेश में पहली इंटीग्रेटेड रीसाइक्लिंग फैक्ट्री शुरू कर दी है। यह प्लांट यूपी के सिकंदराबाद इंडस्ट्रियल एरिया में लगाया गया है और इसका मकसद पुरानी बैटरियों और दुर्लभ धातुओं (रेयर अर्थ) को दोबारा इस्तेमाल में लाना है ताकि देश की इलेक्ट्रिक गाड़ियों और क्लीन एनर्जी सेक्टर को मजबूत बनाया जा सके।
यह प्लांट “कचरे से खजाना” बनाने का काम करेगा। पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे में लिथियम और कोबाल्ट जैसी कई कीमती धातुएं होती हैं। यह प्लांट उन्हें निकालकर फिर से इस्तेमाल में लाता है। कचरा कीमती संसाधन बन जाता है। ये देश के लिए बेहद जरूरी है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के लिए जरूरी मटेरियल मिलेगा। बाहर से धातुएं मंगाने पर निर्भरता कम होगी। पर्यावरण को कम नुकसान होगा । क्लीन एनर्जी सेक्टर को मजबूती मिलेगी यहां हर साल करीब 10,000 टन लिथियम-आयन बैटरियों को रीसाइकल किया जाएगा। इसके अलावा हर महीने 60 टन तक रेयर अर्थ मैग्नेट्स को प्रोसेस किया जाएगा। कंपनी जल्द ही एक नई यूनिट भी जोड़ने वाली है, जिसमें सालाना 1,500 टन रेयर अर्थ क्लोराइड तैयार किया जाएगा।
इस प्लांट की सबसे खास बात इसकी एडवांस टेक्नोलॉजी है। कंपनी ने अपनी खुद की “R2 टेक्नोलॉजी” तैयार की है, जो पुरानी बैटरियों को तोड़कर उनमें से काम की धातुएं जैसे एल्युमिनियम, कॉपर और आयरन निकाल लेती है। इस प्रोसेस में 98% तक रिकवरी का दावा किया जाता है। लगभग पूरा माल वापस काम का बन जाता है। साथ ही यह तकनीक खतरनाक गैसों को भी कंट्रोल करती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान कम होता है। यह प्लांट करीब 95 तरह की अलग-अलग बैटरी स्क्रैप को प्रोसेस कर सकता है, चाहे वह इस्तेमाल के बाद की बैटरी हो या फैक्ट्री से निकला वेस्ट। आगे चलकर कंपनी यहां “बैटरी रिफर्बिशमेंट” भी शुरू करेगी। जो बैटरियां अभी भी काम लायक हैं, उन्हें ठीक करके दोबारा इस्तेमाल में लाया जाएगा।
इलेक्ट्रिक मोटर और इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी रेयर अर्थ मैग्नेट्स को भी यहां अलग करके दोबारा उपयोग के लायक बनाया जाएगा। इसके लिए खास मशीनें लगाई गई हैं, ताकि काम तेजी और सटीकता से हो सके। Rocklink India का यह प्लांट भारत के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि “कचरे से संसाधन” बनाकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ेगा।
