INDIA में पेट्रोल ने मारी सेंचुरी, दिल्ली में 100 रुपये के पार

नई दिल्ली: देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है। दो हफ्तों से भी कम समय में यह चौथी बढ़ोतरी है और इस बार कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही पिछले दो हफ्तों में पेट्रोल-डीजल करीब ₹8 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। CNG के दाम भी बढ़े हैं। इसका असर सीधे परिवहन लागत पर पड़ सकता है। ट्रक, बस, टैक्सी और माल ढुलाई सेवाओं की लागत बढ़ने से सब्जियों, फल, दूध, किराना और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए परिचालन खर्च बढ़ने से किराया बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है।

लगातार बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब सिर्फ वाहन चलाने की लागत नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि इसका असर आम लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर और रोजमर्रा के खर्च तक दिखाई देने लगा है। हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। पेट्रोल फिर से ₹100 के आंकड़े को पार कर चुका है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर बिक रहा है। Kolkata में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 प्रति लीटर हो गया है, जो चारों महानगरों में सबसे ज्यादा कीमतों में शामिल है। वहीं Chennai में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

15 मई को करीब चार साल बाद कीमतों में बड़ा बदलाव करते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों पर 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। इसके बाद 19 मई को दोनों ईंधनों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। फिर 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा किया गया। अब चौथी बढ़ोतरी के बाद कुल इजाफा करीब 8 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। यानी दो हफ्तों से भी कम समय में ईंधन कीमतों में लगातार चार झटके लगे हैं।

CNG इस्तेमाल करने वालों को भी राहत नहीं मिली है।दिल्ली में हाल ही में CNG के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं, जिसके बाद कीमत 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। यह सिर्फ 10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी बताई जा रही है। CNG महंगी होने से ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहनों की लागत भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, डॉलर के मुकाबले मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बना रहे हैं।