Ashok Leyland के मेड इन इंडिया ट्रक: हर ट्रिप में चार टन ज्यादा माल, बढ़ेगी कमाई

Ashok Leyland के मेड इन इंडिया ट्रक: हर ट्रिप में चार टन ज्यादा माल, बढ़ेगी कमाई

पुराने ट्रकों की विदाई, नए AVTR ट्रकों की होगी एंट्री

छह साल में करीब 30 लाख रुपये तक अतिरिक्त आय

Air Suspension तकनीक से Ashok Leyland ने बदला खेल

देश की दूसरी सबसे बड़ी ट्रक निर्माता कंपनी Ashok Leyland ने सोमवार को अपने नए AVTR Heavy Trucks लॉन्च किए हैं। इन ट्रकों की सबसे बड़ी खासियत Air Suspension तकनीक है, जिसकी मदद से ग्राहक 42 टन की जगह 46 टन तक माल ले जा सकेंगे। कंपनी का दावा है कि इससे ट्रांसपोर्टरों की कमाई में बड़ा इजाफा होगा और छह साल में करीब 30 लाख रुपये तक अतिरिक्त आय हासिल की जा सकती है।

Ashok Leyland के President-M&HCV संजीव कुमार ने कहा कि मौजूदा नियमों में मल्टी-एक्सल ट्रकों के लिए अधिकतम 49 टन GVW की अनुमति है, लेकिन अब तक ग्राहकों के पास 42 और 49 टन के बीच कोई बेहतर विकल्प नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए कंपनी ने नया Air Suspension प्लेटफॉर्म तैयार किया है।

इस नई तकनीक की बदौलत 46 टन क्षमता वाला ट्रक उसी टायर कॉन्फिगरेशन के साथ उपलब्ध होगा, जो अभी 42 टन वाले मॉडल में इस्तेमाल होता है। ग्राहक बिना बड़े बदलाव के हर ट्रिप में 4 टन अतिरिक्त माल ढो सकेंगे। कंपनी के अनुसार यह अतिरिक्त क्षमता ट्रांसपोर्ट कारोबार के लिए बड़ा आर्थिक फायदा साबित होगी।

संजीव कुमार ने बताया कि नए ट्रक की कीमत पारंपरिक मॉडल से करीब 3 से 4 प्रतिशत ज्यादा होगी, लेकिन अतिरिक्त माल ढुलाई से होने वाली कमाई इस लागत को आसानी से पूरा कर देगी।

कंपनी ने बताया कि यह अतिरिक्त पेलोड ARAI के मौजूदा नियमों के तहत ही संभव हुआ है, क्योंकि Air Suspension वाले वाहनों को ज्यादा पेलोड की अनुमति मिलती है। इस तकनीक को विकसित करने में चार साल लगे हैं और ट्रकों का 2 से 3 लाख किलोमीटर तक अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण किया गया है। पूरी तकनीक 100 प्रतिशत स्थानीय (Localized) है। इसे Ashok Leyland की इंजीनियरिंग टीम ने विकसित किया है।

Ashok Leyland को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में Medium & Heavy Commercial Vehicle (M&HCV) उद्योग 5 से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। कंपनी के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह पुराने ट्रकों की रिप्लेसमेंट, सरकार का बढ़ता इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, निजी क्षेत्र का बढ़ता कैपेक्स और निर्माण गतिविधियों में तेजी है।