‘पहले चार्जिंग स्टेशन बनाइए, फिर EV को जरूरी बना ग्रीन दिल्ली का सपना दिखाइए’

‘पहले चार्जिंग स्टेशन बनाइए, फिर EV को जरूरी बना ग्रीन दिल्ली का सपना दिखाइए’

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी लागू होने से पहले ही इसका विरोध शुरू हो गया है। दिल्ली NCR ट्रांसपोर्ट एकता मंच ने नई नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य बनाने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को पत्र लिखा है। संगठन का कहना है कि राजधानी में अभी पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क, सस्ती फाइनेंस सुविधा और बैटरियों के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ईवी को अनिवार्य करना लाखों ड्राइवरों और छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर भारी आर्थिक बोझ डालेगा।

यूनियन ने विशेष रूप से उस प्रावधान का विरोध किया है, जिसके तहत 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए ऑटो-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक ऑटो के रूप में ही होगा। संगठन का कहना है कि सरकार पहले जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करे और उसके बाद ही ऐसी अनिवार्यता लागू करे। दिल्ली NCR ट्रांसपोर्ट एकता मंच के महासचिव श्याम सुंदर ने 9 जुलाई को लिखे पत्र में कहा कि फिलहाल शहर में पर्याप्त ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं, आसान लोन, व्यावहारिक ट्रांजिशन प्लान और लिथियम-आयन बैटरियों के सुरक्षित रीसाइक्लिंग की स्पष्ट नीति मौजूद नहीं है। इन व्यवस्थाओं के बिना ईवी को अनिवार्य बनाना उचित नहीं होगा।

यूनियन ने साफ किया कि वह स्वच्छ पर्यावरण और आधुनिक तकनीक का समर्थन करती है, लेकिन बिना पर्याप्त तैयारी और हितधारकों से व्यापक चर्चा किए किसी नीति को लागू करना न्यायसंगत नहीं है। संगठन ने सरकार से अनिवार्य प्रावधानों की तत्काल समीक्षा करने और सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों, वाहन मालिकों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा करने की मांग की है। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति के तहत 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही नए रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा अप्रैल 2028 से राजधानी में पंजीकृत होने वाले सभी नए दोपहिया वाहन भी इलेक्ट्रिक होंगे। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देना है।