2027 से क्रैश टेस्ट के नियम सख्त, माइलेज-फीचर्स नहीं, कार की सेफ्टी का भी इम्तिहान

2027 से क्रैश टेस्ट के नियम सख्त, माइलेज-फीचर्स नहीं, कार की सेफ्टी का भी इम्तिहान

• 56 की जगह 64 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से क्रैश टेस्ट

• Bharat NCAP 2.0 लाएगा नए नियम, पांच स्टार पाना होगा मुश्किल, भारी बैरियर से होगी जांच

• कारों के पांच क्रैश टेस्ट, पहली बार सामने और पीछे की टक्कर की भी परीक्षा

भारत में कार खरीदने वालों के लिए सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होगा। केंद्र सरकार ने कारों के क्रैश टेस्ट से जुड़े नए और सख्त नियम अधिसूचित किए हैं। इन्हें अक्टूबर 2027 से लेकर 2032 तक अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। नए नियमों में सामने और साइड से टक्कर, पीछे से होने वाली टक्कर, एयरबैग और सीटबेल्ट की सुरक्षा, पैदल यात्रियों को चोट से बचाने और इलेक्ट्रिक कारों में हादसे के बाद बिजली के झटके से सुरक्षा जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया है। दूसरी ओर, Bharat NCAP 2.0 भी अक्टूबर 2027 से कारों की सुरक्षा जांच का दायरा बढ़ाएगा। कार खरीदते समय माइलेज और फीचर्स पर ही नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा रेटिंग पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

नए नियमों में सामने से टक्कर होने पर कार के अगले हिस्से के एक भाग पर पड़ने वाले प्रभाव यानी ऑफसेट फ्रंटल क्रैश और साइड से टक्कर के परीक्षणों को ज्यादा सख्त बनाया जाएगा। ये मानक नए मॉडल पर अक्टूबर 2027 और बाजार में पहले से मौजूद सभी मॉडल पर अक्टूबर 2028 से लागू होंगे। पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया गया है। अक्टूबर 2028 से नए मॉडल के लिए संशोधित मानक लागू होंगे। अक्टूबर 2032 से पैदल यात्री की टांग में संभावित चोट का आकलन करने के लिए विशेष परीक्षण उपकरण का इस्तेमाल करना होगा। अप्रैल 2029 से सभी कारों को पीछे से टक्कर के दौरान सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

Bharat NCAP कारों को एक से पांच स्टार तक की सुरक्षा रेटिंग देता है। इसमें सामने से 64 किलोमीटर प्रति घंटे, साइड से 50 किलोमीटर प्रति घंटे और पोल से टक्कर के परीक्षण किए जाते हैं।

अक्टूबर 2027 से प्रस्तावित Bharat NCAP 2.0 के तहत परीक्षणों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाएगी। इसमें कार के पूरे अगले हिस्से की 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कठोर दीवार से टक्कर और पीछे से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर टक्कर का परीक्षण भी शामिल होगा। साइड से टक्कर करने वाले बैरियर का वजन 950 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,300 किलोग्राम किया जाएगा। पोल टेस्ट की रफ्तार भी 29 से बढ़ाकर 32 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

नई रेटिंग व्यवस्था में वयस्कों और बच्चों की सुरक्षा के अलग-अलग स्कोर की जगह 100 अंकों का संयुक्त स्कोर प्रस्तावित है। इसमें दुर्घटना के दौरान सुरक्षा के 55 अंक, पैदल यात्रियों की सुरक्षा के 20 अंक, ड्राइवर को चेतावनी देने वाली तकनीक के 10 अंक, दुर्घटना से बचाव में मदद करने वाली तकनीक के 10 अंक और दुर्घटना के बाद की सुरक्षा के पांच अंक होंगे। पांच स्टार हासिल करने के लिए 2027 से 70 अंक और 2029 से 80 अंक जरूरी होंगे।