नई दिल्ली। इंडिया में तेजी से बढ़ती कनेक्टेड कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों को साइबर हमलों से बचाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार नए वाहनों के लिए एक सख्त ऑटो साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क तैयार कर रही है, जिसे अगले छह महीने के भीतर लागू करने की तैयारी है। इस नियम का उद्देश्य नई गाड़ियों को हैकिंग, डेटा चोरी और अनधिकृत नियंत्रण से सुरक्षित बनाना है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित नियमों में ऐसी साइबर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य की जाएगी, जिससे देश में बिकने वाले नए वाहन हैकिंग के खिलाफ ज्यादा सुरक्षित हो सकें। सरकार खास तौर पर उन फीचर्स पर नजर रख रही है, जहां वाहन का डेटा इंटरनेट के जरिए कलेक्ट, प्रोसेस और इस्तेमाल किया जाता है।
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि नई गाड़ियों में किस तरह के साइबर सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे। प्रस्तावित नियमों में वाहनों की हैकिंग-प्रूफ क्षमता को मुख्य प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब हाल ही में मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा बैटरियों में अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ के मामले सामने आए थे। इसके बाद सरकार ने कुछ ऐसे मोबाइल ऐप पर रोक लगाई थी, जिनका इस्तेमाल ई-रिक्शा बैटरी सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा था।
अब चिंता सिर्फ बैटरी तक सीमित नहीं है। आधुनिक कारों में ऑटोमैटिक पार्किंग, ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, लेन असिस्ट और अन्य एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसे फीचर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर इन सिस्टम में साइबर सुरक्षा कमजोर हुई तो वाहन की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। नीति आयोग के आकलन के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत में बिकने वाली करीब 90 प्रतिशत पैसेंजर गाड़ियां ADAS तकनीक से लैस हो सकती हैं। इनमें लेन डिपार्चर वार्निंग, एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे फीचर्स शामिल होंगे। सरकार मौजूदा कनेक्टेड वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी विचार कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह देखा जा रहा है कि क्या पुराने कनेक्टेड वाहनों में ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट के जरिए साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकता है।
ऑटो इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक वाहन, कनेक्टेड कार और स्मार्ट ड्राइविंग तकनीक तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा अब सिर्फ कंप्यूटर या मोबाइल तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वाहन सुरक्षा का भी अहम हिस्सा बन चुका है। सरकार का नया फ्रेमवर्क लागू होने के बाद भारत में बिकने वाली नई कारों, इलेक्ट्रिक वाहनों और कनेक्टेड व्हीकल्स के लिए साइबर सुरक्षा मानक ज्यादा मजबूत हो सकते हैं। इससे भविष्य की स्मार्ट कारें न सिर्फ ज्यादा हाईटेक होंगी, बल्कि ग्राहकों के डेटा और वाहन नियंत्रण को भी ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
