नई दिल्ली। इंडिया में डीजल कारों का दौर भले ही छोटा हो रहा है, लेकिन डीजल खत्म नहीं हुआ है। अब इसका सबसे मजबूत ठिकाना SUV सेगमेंट बन गया है। जुलाई 2026 में देश में डीजल कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 17.73% पहुंच गई, जो जून में 16.32% थी। पेट्रोल से दूरी बनाने वाले कुछ खरीदार अभी भी डीजल को मजबूत विकल्प मान रहे हैं।
एक समय था जब Swift, Dzire, Grand i10, i20 और Celerio जैसी छोटी कारों में भी डीजल इंजन मिलता था। ग्राहक कम ईंधन खर्च और ज्यादा माइलेज के लिए इन्हें पसंद करते थे। लेकिन BS6 नियमों के बाद डीजल इंजन को ज्यादा महंगा और तकनीकी रूप से जटिल बनाना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि कंपनियों ने छोटी कारों में डीजल बंद करना शुरू कर दिया। आज भारत की सबसे सस्ती डीजल कार Tata Altroz है, जिसकी कीमत करीब 8.24 लाख रुपये से शुरू होती है। इसके बाद ज्यादातर विकल्प SUV या SUV जैसी गाड़ियों में हैं। SUV बड़ी और भारी होती हैं। इनमें लंबी दूरी, हाईवे ड्राइव और ज्यादा सामान के साथ चलने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में डीजल इंजन का ज्यादा टॉर्क, बेहतर हाईवे माइलेज और लोड खींचने की क्षमता काम आती है। यही वजह है कि Thar, Scorpio, XUV, Fortuner जैसी गाड़ियों में डीजल की मांग अभी भी बनी हुई है।
FADA के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में डीजल की हिस्सेदारी 17.73% रही। वहीं पेट्रोल/एथेनॉल की हिस्सेदारी घटकर 41.68% रह गई। CNG की 24.67%, हाइब्रिड की 8.02% और इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 7.90% रही। E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कुछ ग्राहकों की चिंताओं ने भी बाजार का रुख बदला है। ऐसे में CNG, हाइब्रिड, EV और डीजल जैसे विकल्पों पर खरीदारों का ध्यान बढ़ा है। हालांकि इसे डीजल की जोरदार वापसी कहना जल्दबाजी होगी। असल बदलाव यह है कि डीजल अब हर तरह की कार का इंजन नहीं रहा। यह धीरे-धीरे SUV और लंबी दूरी की गाड़ियों का खास ईंधन बनता जा रहा है। डीजल का सफर खत्म नहीं हुआ है, बस उसका ठिकाना बदल गया है।
